
नई भवन उपविधि लागू करने से इनकार, एलआईजी-ईडब्ल्यूएस मकानों के सेटबैक भी हटाने के निर्देश; पूरे शहर में अवैध निर्माण की होगी जांच
मेरठ। मेरठ के शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया। न्यायालय ने एक अप्रैल को सील की गई 44 संपत्तियों के अवैध निर्माण को ध्वस्त कर उन्हें स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप मूल स्वरूप में लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही निम्न आय वर्ग (LIG) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के मकानों में सेटबैक क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माण को भी हटाने का आदेश दिया है।
नई भवन उपविधि लागू करने की मांग ठुकराई
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने आवंटियों को राहत देने के लिए नई भवन निर्माण उपविधि लागू करने का आग्रह किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
पूरे शहर में होगी अवैध निर्माण की पहचान
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (आवास एवं शहरी नियोजन) को निर्देश दिए हैं कि मेरठ शहर के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे आवासीय भवनों की पहचान की जाए, जहां नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
कोर्ट ने इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सितंबर में होने वाली अगली सुनवाई के दौरान प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमुख बातें
- शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट की 44 सील की गई संपत्तियों के अवैध हिस्से ध्वस्त किए जाएंगे।
- सभी संपत्तियों को स्वीकृत मानचित्र के अनुसार मूल स्वरूप में लाना होगा।
- एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के मकानों में सेटबैक पर हुए अवैध निर्माण भी हटाए जाएंगे।
- नई भवन निर्माण एवं भू-उपयोग उपविधि का लाभ देने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार किया।
- प्रमुख सचिव (आवास एवं शहरी नियोजन) को पूरे मेरठ शहर में आवासीय भवनों में चल रहे व्यावसायिक उपयोग की जांच कर रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए गए।
शहर में बढ़ सकती है कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद मेरठ में अवैध निर्माण और आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। माना जा रहा है कि प्रशासन अब अन्य क्षेत्रों में भी सर्वे कर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई तेज कर सकता है।
यह फैसला न केवल शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट, बल्कि पूरे मेरठ शहर में भवन निर्माण नियमों के पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।