
लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक लाख रुपये के इनामी और लंबे समय से फरार चल रहे वांछित अपराधी मुस्तफिजुल को मुठभेड़ के दौरान घायल कर दबोच लिया। आरोपी पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह लंबे समय से कानून प्रवर्तन एजेंसियों की गिरफ्त से बचता फिर रहा था। फिलहाल उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। चिकित्सकीय अनुमति मिलने के बाद पुलिस उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार करेगी।
₹1 लाख का इनाम था घोषित
एसटीएफ के अनुसार, मुस्तफिजुल को पहले ही वांछित अपराधी घोषित किया जा चुका था और उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके खिलाफ न्यायालय की कार्यवाही का पालन नहीं करने (Non-compliance with Court Proceedings) और आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) जैसे मामलों में भी अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं।
महाराष्ट्र पुलिस हिरासत से हुआ था फरार
जांच एजेंसियों के मुताबिक, 10 दिसंबर 2024 को मुस्तफिजुल महाराष्ट्र के अमरावती ग्रामीण जिले में पुलिस हिरासत से फरार हो गया था। इस घटना के बाद उसके खिलाफ एक और आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया। हिरासत से भागने के बाद वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा, जिससे पुलिस को उसकी तलाश में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
2026 में हरदोई में भी दर्ज हुआ नया मुकदमा
एसटीएफ ने बताया कि वर्ष 2026 में हरदोई जिले के बिलग्राम थाने में भी उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एक नया मुकदमा दर्ज किया गया। इससे उसके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या और बढ़ गई है।
इलाज के बाद होगी औपचारिक गिरफ्तारी
मुठभेड़ में घायल होने के कारण आरोपी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस का कहना है कि चिकित्सकों से फिटनेस प्रमाणपत्र मिलने के बाद उसे विधिक प्रक्रिया के तहत औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया जाएगा और अदालत में पेश किया जाएगा।
संगठित अपराध गिरोह से कनेक्शन की जांच
एसटीएफ और अन्य जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि मुस्तफिजुल का संबंध किसी संगठित अपराध गिरोह से था या नहीं। इसके अलावा उसके कब्जे से बरामद अवैध हथियार की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं उसका इस्तेमाल किसी अन्य आपराधिक वारदात में तो नहीं किया गया।
पूछताछ में खुल सकते हैं कई राज
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आरोपी से पूछताछ में उसके नेटवर्क, सहयोगियों, फरारी के दौरान मिली मदद और अन्य लंबित मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसियां उसके आपराधिक इतिहास और विभिन्न राज्यों में सक्रिय नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं।