
हापुड़। गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली क्षेत्र के गांव रेतावाली मड़ैया में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पुलिस ने पति को गिरफ्तार किया है। विवाहिता का शव गांव के जंगल में एक पेड़ से लटका मिला था। घटना के बाद मायके पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने दहेज हत्या सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
करीब दो वर्ष पहले हुई थी शादी
पुलिस के अनुसार, गांव रेतावाली मड़ैया निवासी मनवीर सिंह की शादी लगभग दो वर्ष पूर्व अमरोहा जनपद के हतिया खेड़ा गांव निवासी प्रियंका के साथ हुई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विवाह के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद होने की बात सामने आई है। इन परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है।
मायके पक्ष ने लगाए दहेज उत्पीड़न के आरोप
मृतका के परिजनों ने शिकायत में आरोप लगाया है कि विवाह के समय दहेज दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद विवाहिता पर अतिरिक्त नकद राशि और अन्य सामान की मांग को लेकर दबाव बनाया जाता था।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि घटना से पहले विवाहिता के साथ मारपीट और उत्पीड़न किया गया। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है। इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
घटना से पहले फोन पर शिकायत करने का दावा
मायके पक्ष का दावा है कि घटना से कुछ दिन पहले प्रियंका ने फोन कर अपने साथ कथित मारपीट और प्रताड़ना की जानकारी दी थी। पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है।
फोरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची तथा घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य जांच का महत्वपूर्ण आधार होंगे।
पति गिरफ्तार, जांच जारी
गढ़ कोतवाली प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र बिष्ट ने बताया कि मायके पक्ष की तहरीर के आधार पर दहेज हत्या सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में आरोपी पति को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
उन्होंने कहा कि पुलिस सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
नोट: यह समाचार पुलिस में दर्ज एफआईआर और प्रारंभिक जांच पर आधारित है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। आरोपी को कानूनन दोषी तब तक नहीं माना जाता, जब तक न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध न कर दिया जाए।