
पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने निर्वाचन आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग की, कांग्रेस विधायक के आरोपों को बताया निराधार
ऊधम सिंह नगर। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले की किच्छा विधानसभा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने मतदाता सूची में कथित दोहरी प्रविष्टियों का दावा करते हुए निर्वाचन आयोग से निष्पक्ष जांच और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है।
पत्रकार वार्ता में राजेश शुक्ला ने दावा किया कि किच्छा विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनके नाम उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की मतदाता सूचियों में भी दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि उनकी टीम ने 8,184 ऐसे मतदाताओं को चिह्नित किया है, जिनके नाम दो स्थानों पर दर्ज होने का दावा है।
बोले- हर वैध मतदाता का अधिकार सुरक्षित रहे
राजेश शुक्ला ने कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण किसी जाति या धर्म के खिलाफ अभियान नहीं होना चाहिए। प्रत्येक वैध मतदाता का मताधिकार सुरक्षित रहना जरूरी है। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति का नाम दो स्थानों पर दर्ज है तो उसकी नियमानुसार जांच और सत्यापन किया जाना चाहिए।
उन्होंने निर्वाचन अधिकारियों से मांग की कि दर्ज आपत्तियों की निष्पक्ष जांच कर संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में दोहरी प्रविष्टियां नियम विरुद्ध पाई जाती हैं तो संबंधित मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
SIR को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
किच्छा में SIR को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ ने आरोप लगाया है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तियां मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाकर दर्ज कराई जा रही हैं।
वहीं, राजेश शुक्ला ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आपत्तियां निर्वाचन प्रक्रिया के तहत दर्ज कराई गई हैं। उनका दावा है कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि प्राप्त आपत्तियों की जांच नियमानुसार की जाएगी। दस्तावेजों के सत्यापन और जांच के बाद ही किसी मतदाता के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
राजेश शुक्ला का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और पारदर्शी होना जरूरी है। उन्होंने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग हटकर प्रत्येक आपत्ति की तथ्य और दस्तावेजों के आधार पर जांच किए जाने पर जोर दिया।