
हापुड़। श्रावण मास और कांवड़ यात्रा को देखते हुए हापुड़ वन विभाग ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। सिंभावली क्षेत्र और आसपास के कुछ इलाकों में हाल के दिनों में तेंदुए की गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने संवेदनशील मार्गों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने का निर्णय लिया है।
विभाग के अनुसार, जिन मार्गों से कांवड़िए वन क्षेत्र या जंगल के समीप होकर गुजरेंगे, वहां विशेष निगरानी रखी जाएगी। श्रद्धालुओं को जागरूक करने के लिए प्रत्येक चार किलोमीटर की दूरी पर चेतावनी एवं सूचना संबंधी बैनर लगाए जाएंगे। इन बैनरों पर वन विभाग और संबंधित अधिकारियों के संपर्क नंबर भी उपलब्ध रहेंगे, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सूचना दी जा सके।
संवेदनशील क्षेत्रों की हुई पहचान
वन विभाग ने उन स्थानों को चिन्हित किया है जहां पहले वन्यजीवों, विशेषकर तेंदुए की गतिविधियों की सूचना मिल चुकी है। कांवड़ यात्रा के दौरान इन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाएगी और नियमित गश्त की जाएगी।
अस्थायी वन चौकियां रहेंगी सक्रिय
यात्रा मार्ग के संवेदनशील हिस्सों में अस्थायी वन चौकियां स्थापित की जाएंगी। इन चौकियों पर वन कर्मियों की 24 घंटे तैनाती रहेगी। किसी भी वन्यजीव की सूचना मिलने पर टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई करेगी।
पांच सदस्यीय रेस्क्यू टीम रहेगी तैयार
वन विभाग ने एक विशेष प्रशिक्षित पांच सदस्यीय रेस्क्यू टीम भी गठित करने का निर्णय लिया है। यह टीम कांवड़ यात्रा के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखेगी और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस तथा प्रशासन के साथ समन्वय कर स्थिति का प्रबंधन करेगी।
ब्रजघाट मार्ग पर रहती है भारी भीड़
हर वर्ष श्रावण मास में लाखों श्रद्धालु ब्रजघाट से गंगाजल लेकर विभिन्न जिलों और राज्यों के शिवालयों के लिए रवाना होते हैं। इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग-9 और उससे जुड़े मार्गों पर श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। इसे देखते हुए वन विभाग और जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की योजना बनाई है।
वन विभाग की अपील
वन विभाग ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से अपील की है कि यदि किसी स्थान पर तेंदुआ या कोई अन्य वन्यजीव दिखाई दे तो उसके पास जाने, उसे घेरने या भगाने का प्रयास न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग या पुलिस को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित तरीके से आवश्यक कार्रवाई कर सके।
डीएफओ ने क्या कहा?
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) गौतम सिंह ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मार्गों पर चेतावनी बैनर, अस्थायी वन चौकियां और विशेष निगरानी टीम तैनात की जाएगी। विभाग का उद्देश्य वन्यजीवों और श्रद्धालुओं दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।