
Hapur News: हापुड़ का वेलनेस अस्पताल एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि अस्पताल में कथित रूप से आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता नहीं रखने वाली एक महिला कर्मचारी ऑपरेशन से जुड़ी प्रक्रिया करती दिखाई दे रही है। वायरल वीडियो और उसके साथ किए जा रहे दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह अस्पताल पूर्व में एक प्रसूता की मौत से जुड़े प्रकरण के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई का सामना कर चुका है। ऐसे में नए वीडियो के सामने आने के बाद अस्पताल में चिकित्सकीय मानकों, योग्य स्टाफ की तैनाती और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं।
वायरल वीडियो में क्या किया जा रहा दावा?
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि अस्पताल से जुड़ी एक महिला कर्मचारी कथित तौर पर ऑपरेशन से संबंधित प्रक्रिया में शामिल दिखाई दे रही है और उसके पास इसके लिए आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता नहीं है।
हालांकि केवल वायरल वीडियो के आधार पर संबंधित व्यक्ति की योग्यता, वीडियो के समय और स्थान तथा उसमें वास्तव में कौन-सी चिकित्सकीय प्रक्रिया की जा रही थी, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती। इन सभी तथ्यों का निर्धारण स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही संभव होगा।
पहले भी कार्रवाई के घेरे में आ चुका अस्पताल
वेलनेस अस्पताल का नाम इससे पहले एक प्रसूता की मौत से जुड़े मामले में सामने आया था। गांव बदनौली निवासी 24 वर्षीय मेधा की प्रसव के बाद मौत के मामले में परिजनों ने उपचार में कथित लापरवाही के आरोप लगाए थे।
परिजनों का आरोप था कि प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होने के बावजूद समय पर समुचित उपचार नहीं मिला। घटना के बाद अस्पताल में हंगामा हुआ था और पुलिस को भी मौके पर पहुंचना पड़ा था। मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल को सील किए जाने की कार्रवाई की गई थी।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि उस प्रकरण में लगाए गए चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की अंतिम जिम्मेदारी संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निर्धारित की जा सकती है।
वीडियो ने फिर खड़े किए कई सवाल
ताजा वीडियो सामने आने के बाद निजी अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर और अन्य संवेदनशील चिकित्सा सेवाओं में तैनात कर्मचारियों की योग्यता और पंजीकरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
जांच में यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि वीडियो वास्तव में इसी अस्पताल का है या नहीं, वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया, उसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं, संबंधित व्यक्ति की वास्तविक चिकित्सकीय योग्यता क्या है और वह किस भूमिका में चिकित्सा प्रक्रिया में शामिल था।
यदि किसी अनधिकृत या अयोग्य व्यक्ति द्वारा ऐसी चिकित्सकीय प्रक्रिया किए जाने की पुष्टि होती है, जिसके लिए निर्धारित योग्यता और पंजीकरण आवश्यक है, तो सक्षम प्राधिकारी लागू नियमों के तहत कार्रवाई कर सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल
मामले के बाद निजी अस्पतालों के नियमित निरीक्षण और चिकित्सकीय स्टाफ के दस्तावेजों के सत्यापन की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर मांग की जा रही है कि जांच केवल वायरल वीडियो तक सीमित न रखकर अस्पताल के पंजीकरण, चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की योग्यता, ऑपरेशन थिएटर रिकॉर्ड तथा संबंधित अवधि के मरीजों के दस्तावेजों की भी नियमानुसार जांच की जाए।
CMO बोले— जांच के बाद होगी नियमानुसार कार्रवाई
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. किशोर आहूजा के अनुसार वायरल वीडियो का मामला संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जा रही है। जांच में यदि नियमों के उल्लंघन या लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों और संस्थान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि वीडियो कहां और कब बनाया गया, उसमें दिखाई देने वाली चिकित्सकीय गतिविधि क्या थी और संबंधित व्यक्ति उसे करने के लिए अधिकृत तथा योग्य था या नहीं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष जांच और तथ्यों को सार्वजनिक करना महत्वपूर्ण होगा, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ किसी व्यक्ति या संस्थान के खिलाफ अपुष्ट दावों के आधार पर निष्कर्ष भी न निकाला जाए।
डिस्क्लेमर: यह समाचार वायरल वीडियो, शिकायतों/दावों और उपलब्ध आधिकारिक प्रतिक्रिया पर आधारित है। वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी व्यक्ति को “बिना डिग्री”, “अयोग्य” या चिकित्सकीय लापरवाही का दोषी तब तक नहीं माना जाना चाहिए, जब तक सक्षम जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया से इसकी पुष्टि न हो। संबंधित अस्पताल और व्यक्तियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।