
Hapur News: साइबर अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन साइबर ब्रज’ के तहत हापुड़ साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े संदिग्ध बैंक खाते का पता लगाया है। पुलिस जांच के अनुसार इस खाते से करीब 3.99 करोड़ रुपये से अधिक के साइबर फ्रॉड से जुड़े संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं। खाते के संबंध में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर भी दो शिकायतें दर्ज होने की बात सामने आई है।
मामले में खाताधारक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अब बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजेक्शन की पड़ताल कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि खाते का इस्तेमाल किन लोगों ने किया और इसके पीछे कोई बड़ा साइबर अपराध नेटवर्क सक्रिय है या नहीं।
‘ऑपरेशन साइबर ब्रज’ के तहत संदिग्ध खातों की जांच
पुलिस के अनुसार साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध और म्यूल बैंक खातों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में हापुड़ साइबर क्राइम थाने में तैनात उपनिरीक्षक सुधीर कुमार द्वारा संदिग्ध बैंक खातों की जांच के दौरान एक खाते से बड़ी धनराशि के लेनदेन का मामला सामने आया।
इसके बाद खाते से संबंधित विवरण और NCRP पर उपलब्ध शिकायतों की जांच की गई।
SBI खाते में 3.99 करोड़ से अधिक के लेनदेन की जांच
पुलिस जांच में संबंधित बैंक खाते का खाताधारक नई बस्ती, जामिया नगर, ओखला निवासी फुरकान बताया गया है। पुलिस के मुताबिक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े इस खाते की जांच में करीब 3.99 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन का पता चला।
इसके अलावा NCRP पर इस खाते से संबंधित दो साइबर शिकायतें दर्ज मिलने की बात भी पुलिस जांच में सामने आई है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी धनराशि किन खातों से आई, आगे किन खातों में भेजी गई और इन लेनदेन का वास्तविक लाभार्थी कौन था।
म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किए जाने का संदेह
पुलिस को संदेह है कि संबंधित खाते का इस्तेमाल कथित तौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में किया गया। साइबर अपराधों में म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल ठगी से प्राप्त रकम को प्राप्त करने, आगे ट्रांसफर करने या उसकी वास्तविक धन-श्रृंखला को जटिल बनाने के लिए किया जाता है।
हालांकि खाताधारक की भूमिका और उसे कथित साइबर फ्रॉड की जानकारी थी या नहीं, जैसे पहलुओं की पुष्टि पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
खाताधारक के खिलाफ FIR, नेटवर्क की पड़ताल
उपनिरीक्षक सुधीर कुमार की तहरीर के आधार पर संबंधित खाताधारक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस उसके संभावित ठिकानों और अन्य संबंधित जानकारियों की जांच कर रही है।
साथ ही बैंक स्टेटमेंट, रकम के ट्रांसफर की श्रृंखला, संबंधित खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मामले के तार किसी संगठित साइबर गिरोह से जुड़े हैं या नहीं।
कई अन्य संदिग्ध बैंक खाते भी जांच के दायरे में
साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक मुनीष प्रताप सिंह के अनुसार साइबर अपराधों से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों की जांच लगातार की जा रही है। जांच में साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी अन्य व्यक्ति को कमीशन या किसी आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, यूपीआई या इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा इस्तेमाल करने के लिए न दें। ऐसा खाता साइबर अपराध में इस्तेमाल होने पर खाताधारक भी कानूनी जांच के दायरे में आ सकता है।
क्या होता है ‘म्यूल अकाउंट’?
साइबर ठग आमतौर पर ठगी की रकम सीधे अपने नाम के बैंक खातों में लेने से बचते हैं। इसके बजाय वे दूसरे लोगों के खातों का इस्तेमाल रकम प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए कर सकते हैं। ऐसे खातों को सामान्यतः म्यूल अकाउंट कहा जाता है।
पुलिस और साइबर सुरक्षा एजेंसियां बैंकिंग ट्रांजेक्शन की डिजिटल ट्रेल के आधार पर ऐसे खातों की पहचान करती हैं। इसलिए किसी को अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने देना गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।