साइबर ठगी के ‘म्यूल अकाउंट’ पर पुलिस का शिकंजा, 1.16 लाख के लेनदेन से जुड़ी मिलीं देशभर की 8 शिकायतें

Hapur News: साइबर अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत हापुड़ पुलिस की जांच में एक संदिग्ध बैंक खाते का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार जांच के दायरे में आए बैंक खाते में साइबर फ्रॉड से जुड़े करीब 1.16 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिली है। इतना ही नहीं, इस खाते का संबंध देश के अलग-अलग हिस्सों से दर्ज आठ साइबर शिकायतों से भी सामने आने की बात कही गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल प्रभारी प्रबल कुमार पंकज की तहरीर पर हापुड़ नगर कोतवाली पुलिस ने संबंधित खाताधारक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित खाते का इस्तेमाल किस तरह और किन लोगों द्वारा किया गया।

म्यूल खातों की जांच के दौरान सामने आया मामला

जानकारी के अनुसार साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध ‘म्यूल अकाउंट’ की पहचान के लिए विशेष अभियान के तहत बैंक खातों और उनसे जुड़े संदिग्ध लेनदेन की जांच की जा रही है।

इसी जांच के दौरान आईडीबीआई बैंक का एक खाता पुलिस के रडार पर आया। खाते से संबंधित रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ाई गई तो खाताधारक की पहचान हापुड़ नगर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला शिवदयालपुरा निवासी तैय्यब के रूप में बताई गई।

इसके बाद पुलिस ने खाते से जुड़े लेनदेन और साइबर शिकायतों का रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

हापुड़ से दिल्ली-मुंबई तक, 8 शिकायतों से जुड़ा मिला खाते का रिकॉर्ड

पुलिस जांच में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि संबंधित बैंक खाते का रिकॉर्ड केवल हापुड़ तक सीमित नहीं था।

जानकारी के अनुसार हापुड़ से दो शिकायतों के अलावा दिल्ली से दो तथा बेंगलुरु, मुंबई सिटी, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से जुड़ी साइबर शिकायतों में भी संबंधित बैंक खाते का कनेक्शन सामने आने की बात कही गई है।

इस प्रकार देश के अलग-अलग हिस्सों से दर्ज कुल आठ साइबर शिकायतों से खाते का संबंध मिलने के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या इन सभी मामलों के पीछे कोई एक संगठित साइबर नेटवर्क काम कर रहा था या अलग-अलग साइबर अपराधियों द्वारा संबंधित खाते का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि इन शिकायतों में खाताधारक की वास्तविक भूमिका क्या रही, इसका अंतिम निर्धारण पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

1.16 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन ने बढ़ाया शक

जांच के दौरान संबंधित बैंक खाते में करीब 1.16 लाख रुपये से अधिक के साइबर फ्रॉड से जुड़े संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।

पुलिस अब रकम के पूरे ट्रांजेक्शन ट्रेल की जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रकम किन खातों से आई, खाते में कितने समय तक रही और इसके बाद किन खातों या माध्यमों से आगे भेजी गई।

बैंक स्टेटमेंट और डिजिटल ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड की जांच से पुलिस साइबर ठगी की रकम के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

क्या है ‘म्यूल अकाउंट’, क्यों करते हैं साइबर ठग इस्तेमाल?

साइबर अपराध की दुनिया में ‘म्यूल अकाउंट’ ऐसे बैंक खाते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल अपराध से प्राप्त रकम को लेने और फिर उसे आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।

साइबर अपराधी आमतौर पर ठगी की रकम सीधे अपने नाम के बैंक खातों में लेने से बचते हैं। इसके बजाय अलग-अलग खातों के माध्यम से रकम को तेजी से ट्रांसफर किया जाता है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए पैसे की वास्तविक कड़ी तक पहुंचना मुश्किल हो सके।

कई मामलों में लोगों को कमीशन या आर्थिक लाभ का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड अथवा इंटरनेट बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल किए जाने के मामले भी सामने आते रहे हैं।

हालांकि किसी बैंक खाते में संदिग्ध रकम आने मात्र से खाताधारक की आपराधिक संलिप्तता स्वतः साबित नहीं होती। यह जांच का विषय होता है कि संबंधित व्यक्ति ने जानबूझकर खाता उपलब्ध कराया था या खाते का इस्तेमाल किसी अन्य तरीके से किया गया।

क्या किसी बड़े साइबर गैंग से जुड़ी हैं तार?

एक ही बैंक खाते का संबंध देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज कई साइबर शिकायतों से मिलने के बाद पुलिस अब इसके संभावित नेटवर्क की जांच कर रही है।

पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित खाते का इस्तेमाल करने वाले लोग कौन थे और क्या इसके पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह सक्रिय है।

इसके लिए बैंकिंग रिकॉर्ड के साथ-साथ मोबाइल नंबर, डिजिटल संपर्क, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और अन्य उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि संदिग्ध रकम खाते में आने के बाद कहां भेजी गई और उसके अंतिम लाभार्थी कौन थे।

खाताधारक के खिलाफ मुकदमा दर्ज, तलाश में जुटी पुलिस

सदर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मनीष चौहान के अनुसार साइबर सेल प्रभारी की तहरीर के आधार पर संबंधित खाताधारक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

पुलिस मामले की जांच कर रही है और संबंधित व्यक्ति की तलाश की जा रही है। जांच के दौरान बैंकिंग एवं डिजिटल रिकॉर्ड का भी परीक्षण किया जाएगा।

पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

म्यूल खातों पर कार्रवाई से टूट सकती है साइबर ठगों की आर्थिक चेन

साइबर अपराध के मामलों में बैंक खातों का नेटवर्क बेहद महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। ठगी करने वाले अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस उन खातों की पहचान करती है, जिनमें पीड़ितों से ठगी गई रकम ट्रांसफर हुई होती है।

ऐसे खातों की ट्रांजेक्शन चेन की जांच से पुलिस को रकम के प्रवाह और उससे जुड़े दूसरे खातों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

यही कारण है कि साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध म्यूल खातों के खिलाफ कार्रवाई को साइबर अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पुलिस की अपील—किसी को इस्तेमाल के लिए न दें अपना बैंक खाता

साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही है। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, यूपीआई आईडी, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या ओटीपी उपलब्ध न कराएं।

यदि कोई व्यक्ति कमीशन या पैसे का लालच देकर बैंक खाते में रकम मंगवाने और फिर उसे दूसरे खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

ऐसे बैंक खाते साइबर अपराध में इस्तेमाल हो सकते हैं और खाताधारक को गंभीर कानूनी जांच का सामना करना पड़ सकता है।

किसी भी संदिग्ध बैंकिंग गतिविधि या साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल संबंधित बैंक और साइबर पुलिस को सूचना देना जरूरी है।

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