81 साल बाद फिर सीधे जुड़ेंगे हापुड़-अमरोहा! गंगा पर बनेगा पीपे का पुल, गढ़-तिगरी के बीच आसान होगा सफर

गढ़मुक्तेश्वर और तिगरी के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने की तैयारी, धार्मिक पर्यटन से लेकर व्यापार तक को मिल सकती है नई रफ्तार

Hapur News: गंगा के दो किनारों पर बसे हापुड़ और अमरोहा के बीच दशकों पुराना सीधा संपर्क एक बार फिर बहाल होने की उम्मीद जगी है। गढ़मुक्तेश्वर और तिगरी के बीच गंगा नदी पर पीपे का पुल (पॉन्टून ब्रिज) बनाने की प्रस्तावित योजना से दोनों जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए आवागमन आसान हो सकता है।

प्रस्तावित पुल के अस्तित्व में आने से गढ़मुक्तेश्वर और तिगरी के बीच सीधा संपर्क स्थापित होने के साथ धार्मिक पर्यटन, स्थानीय व्यापार, कृषि और परिवहन को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

इस परियोजना को लेकर शासन और प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात सामने आई है। हापुड़ और अमरोहा प्रशासन के बीच भी गंगा मेले तथा दोनों क्षेत्रों के बेहतर संपर्क को लेकर समन्वय किया जा रहा है।

दशकों पुराना संपर्क फिर बहाल होने की उम्मीद

स्थानीय जानकारों के अनुसार दशकों पहले गंगा नदी के रास्ते गढ़मुक्तेश्वर और तिगरी क्षेत्र के बीच आवागमन अपेक्षाकृत आसान था। पीपों और नावों की सहायता से बनाए जाने वाले अस्थायी संपर्क मार्ग का इस्तेमाल स्थानीय लोग और मेलों में आने वाले श्रद्धालु करते थे।

समय के साथ यह संपर्क व्यवस्था समाप्त हो गई और दोनों किनारों के लोगों को सड़क मार्ग से लंबी दूरी तय करनी पड़ने लगी।

अब गंगा पर प्रस्तावित पीपे के पुल की योजना ने इस पुराने संपर्क को पुनर्जीवित करने की उम्मीद बढ़ा दी है।

यदि परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार धरातल पर उतरती है तो गढ़मुक्तेश्वर और तिगरी के बीच आवागमन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

गढ़मुक्तेश्वर-तिगरी के बीच बनेगा सीधा संपर्क

गढ़मुक्तेश्वर और अमरोहा का तिगरी क्षेत्र गंगा के अलग-अलग किनारों पर स्थित दो प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। दोनों स्थानों पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर विशाल गंगा मेलों का आयोजन होता है।

हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन मेलों में पहुंचकर गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

दोनों क्षेत्रों के बीच सीधा पुल न होने के कारण सड़क मार्ग से आवागमन करने वालों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। पीपे का पुल बनने से यह दूरी कम हो सकती है और श्रद्धालुओं को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी।

कार्तिक गंगा मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को होगा बड़ा फायदा

गढ़मुक्तेश्वर का कार्तिक गंगा स्नान मेला पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इसी प्रकार गंगा के दूसरे किनारे पर अमरोहा जिले में तिगरी गंगा मेले का आयोजन होता है।

इन आयोजनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

प्रस्तावित पीपे का पुल दोनों धार्मिक क्षेत्रों के बीच संपर्क को आसान कर सकता है। इससे श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होने के साथ प्रशासन को भी भीड़ और यातायात प्रबंधन में मदद मिल सकती है।

गंगा की धारा और टापुओं को लेकर भी तैयार होगी योजना

पीपे का पुल बनाने से पहले गंगा की भौगोलिक स्थिति, जलधारा और नदी के बीच बनने वाले टापुओं का तकनीकी अध्ययन महत्वपूर्ण होगा।

योजना के तहत आवश्यक स्थानों पर नदी की धारा को व्यवस्थित करने और आवागमन योग्य मार्ग तैयार करने की दिशा में संबंधित विभागों द्वारा तकनीकी कार्य किया जा सकता है।

चूंकि पीपे का पुल नदी के जलस्तर और मौसम से प्रभावित होता है, इसलिए इसके संचालन के लिए सुरक्षा मानकों और मानसून के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।

सीमावर्ती गांवों को मिल सकता है बड़ा फायदा

प्रस्तावित पुल का सबसे बड़ा फायदा गंगा के दोनों किनारों पर बसे गांवों के लोगों को मिलने की उम्मीद है।

वर्तमान में कई गांवों के लोगों को दूसरे जिले में जाने के लिए सड़क मार्ग से लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। पुल बनने से किसानों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए आवागमन आसान हो सकता है।

विशेष रूप से किसानों को कृषि उपज दूसरे क्षेत्र की मंडियों तक पहुंचाने में वैकल्पिक और छोटा मार्ग मिल सकता है। इससे समय और परिवहन लागत दोनों में कमी आने की संभावना है।

व्यापार को मिलेगी रफ्तार, खुलेंगे रोजगार के नए अवसर

हापुड़ और अमरोहा के बीच सीधा संपर्क बेहतर होने से स्थानीय व्यापार को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

गढ़मुक्तेश्वर धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है, जबकि तिगरी भी गंगा आस्था का महत्वपूर्ण स्थल है। दोनों क्षेत्रों के बीच सीधा आवागमन शुरू होने से होटल, धर्मशाला, परिवहन, भोजनालय, स्थानीय दुकानें और छोटे कारोबार लाभान्वित हो सकते हैं।

मेले के दौरान अस्थायी कारोबार करने वाले दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी व्यापारियों और स्थानीय सेवा प्रदाताओं के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

धार्मिक पर्यटन का बन सकता है नया कॉरिडोर

पीपे का पुल केवल आवागमन का माध्यम ही नहीं, बल्कि गढ़मुक्तेश्वर और तिगरी को जोड़ने वाले धार्मिक पर्यटन मार्ग के रूप में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

दोनों गंगा तटों को बेहतर तरीके से जोड़ने पर श्रद्धालु एक ही यात्रा में दोनों धार्मिक स्थलों तक आसानी से पहुंच सकेंगे।

इससे भविष्य में गंगा किनारे पर्यटन सुविधाओं, घाटों, विश्राम स्थलों और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

हापुड़-अमरोहा प्रशासन के समन्वय से आगे बढ़ेगी योजना

इस तरह की परियोजना के लिए हापुड़ और अमरोहा प्रशासन के साथ सिंचाई विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होगा।

गंगा का जलस्तर, पुल की लंबाई, पहुंच मार्ग, यातायात क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था जैसे तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

प्रस्ताव के धरातल पर उतरने के बाद यह परियोजना दोनों जिलों के बीच संपर्क व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।

डीएम कविता मीना ने क्या कहा?

हापुड़ की जिलाधिकारी कविता मीना के अनुसार कार्तिक गंगा स्नान मेला महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है और इसकी व्यवस्थाओं को लेकर शासन स्तर से लगातार समीक्षा की जाती है।

उन्होंने बताया कि हापुड़ और अमरोहा प्रशासन के बीच संबंधित विषयों पर समन्वय किया जा रहा है तथा प्रस्तावित व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित विभागों के स्तर से प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

प्रस्तावित पीपे का पुल क्षेत्र में जनसुविधा और धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। संबंधित विभागों के समन्वय से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुल बना तो बदल सकती है गंगा पार की तस्वीर

गढ़मुक्तेश्वर और तिगरी के बीच प्रस्तावित पीपे का पुल धरातल पर उतरता है तो इसका प्रभाव केवल श्रद्धालुओं के आवागमन तक सीमित नहीं रहेगा।

इससे दोनों जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच सामाजिक और आर्थिक संपर्क मजबूत हो सकता है। स्थानीय व्यापार को नया बाजार, किसानों को बेहतर संपर्क और धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की संभावना है।

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