हापुड़। पिलखुवा में सिखेड़ा रोड स्थित लाला प्रेमशंकर पंचायती गौशाला में रविवार दोपहर अचानक बड़ी संख्या में गोवंश की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। कुछ ही देर में सात गोवंश की मौत हो गई, जबकि तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पशु चिकित्सा विभाग की तीन टीमें मौके पर पहुंचीं और बीमार गोवंश का उपचार शुरू कराया।
गौशाला में कुल 366 गोवंश मौजूद हैं। अचानक बीमारी फैलने की सूचना के बाद बीमार गोवंश को अलग कर उपचार दिया गया। हापुड़, धौलाना और सिंभावली से पशु चिकित्सकों की टीमें गौशाला पहुंचीं और प्रभावित गोवंश की लगातार निगरानी शुरू कर दी।
दोपहर दो बजे अचानक बिगड़ी हालत
गौशाला के कोषाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण गोयल के अनुसार, रविवार दोपहर करीब दो बजे अचानक कुछ गोवंश की तबीयत बिगड़ने लगी। देखते ही देखते कई गोवंश अस्वस्थ हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पशु चिकित्सा विभाग को सूचना दी गई।
सूचना मिलने पर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, सहायक मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी समेत करीब 14-15 चिकित्सक मौके पर पहुंचे। इसके बाद गौशाला में उपचार अभियान शुरू किया गया। बीमार गोवंश को ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है और चिकित्सकों की टीमें उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
सांस लेने में परेशानी और कंपकंपी के लक्षण
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजपाल के मुताबिक, बीमार गोवंश में सांस लेने में परेशानी और कंपकंपी जैसे लक्षण दिखाई दिए हैं। प्राथमिक जांच में ये लक्षण नाइट्राइट विषाक्तता से मिलते-जुलते पाए गए हैं।
चिकित्सकों ने आशंका जताई है कि ज्वार के चारे में नाइट्राइट की मात्रा अधिक होने की स्थिति में गोवंश में विषाक्तता हो सकती है। इसी संभावना को देखते हुए बीमार गोवंश को एंटीडोट दिया गया है और उपचार जारी है।
हालांकि, पशु चिकित्सा विभाग ने इसे फिलहाल संभावित कारण माना है। गोवंश की मौत की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच और अन्य परीक्षणों के बाद ही हो सकेगी।
चिकित्सकों के पहुंचने से पहले सात की मौत
डॉ. राजपाल के अनुसार, पशु चिकित्सकों की टीमें गौशाला पहुंचने से पहले ही सात गोवंश की मौत हो चुकी थी। वहीं तीन गोवंश की हालत गंभीर बनी हुई है। गंभीर गोवंश को प्राथमिकता के आधार पर उपचार दिया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार उपचार के बाद अधिकांश बीमार गोवंश की हालत में सुधार हुआ है। इसके बावजूद एक साथ बड़ी संख्या में गोवंश के बीमार पड़ने से गौशाला प्रबंधन और पशु चिकित्सा विभाग की चिंता बढ़ गई है।
चारे की गुणवत्ता भी जांच के दायरे में
घटना के बाद गोवंश के अचानक बीमार पड़ने और चारे की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि जांच में नाइट्राइट विषाक्तता की पुष्टि होती है तो ज्वार के चारे की गुणवत्ता और उसे गोवंश को खिलाने की प्रक्रिया भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।
फिलहाल पशु चिकित्सा विभाग की प्राथमिकता बीमार गोवंश को बचाना है। चिकित्सकों की टीमें गौशाला में लगातार उपचार और निगरानी कर रही हैं।
366 गोवंश की निगरानी बढ़ाई
गौशाला में कुल 366 गोवंश होने के कारण बाकी पशुओं की निगरानी भी बढ़ा दी गई है। तीन टीमें मौके पर मौजूद हैं और किसी अन्य गोवंश में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल उपचार देने की व्यवस्था की गई है।
सात गोवंश की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अचानक इतनी बड़ी संख्या में गोवंश की तबीयत क्यों बिगड़ी। क्या ज्वार के चारे में मौजूद नाइट्राइट इसकी वजह बना या कोई अन्य कारण था, इसका स्पष्ट जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
