दिल्ली में सरकारी अफसरों की जवाबदेही तय करने वाला बड़ा बिल, देरी पर रोजाना ₹250 जुर्माने का प्रस्ताव

दिल्ली सरकार ने सरकारी सेवाओं को समयबद्ध बनाने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से विधानसभा में ‘दिल्ली नागरिक समयबद्ध एवं सुगम सेवा प्रदानार्थ अधिकार विधेयक, 2026’ पेश किया है। प्रस्तावित कानून के तहत यदि तय समयसीमा में नागरिक को सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो संबंधित अधिकारी पर प्रतिदिन 250 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकेगा। जुर्माने की अधिकतम सीमा 5,000 रुपये प्रस्तावित है।

सेवा में देरी पर लगेगा जुर्माना

प्रस्ताव के अनुसार, निर्धारित समय में नागरिक को सरकारी सेवा उपलब्ध नहीं कराने पर संबंधित अधिकारी पर प्रतिदिन 250 रुपये की दर से पेनल्टी लगाई जा सकती है। इसकी अधिकतम सीमा 5,000 रुपये होगी।

गलत तरीके से आवेदन खारिज करने पर भी कार्रवाई

यदि किसी नागरिक के आवेदन को अनुचित या गलत तरीके से खारिज किया जाता है तो भी संबंधित अधिकारी पर 250 से 5,000 रुपये तक की पेनल्टी लगाने का प्रावधान प्रस्तावित है।

देरी होने पर स्वत: अपील की व्यवस्था

प्रस्तावित व्यवस्था में सेवा उपलब्ध कराने में देरी होने पर मामला स्वत: नागरिक शिकायत निवारण प्राधिकरण के समक्ष अपील के लिए भेजे जाने का प्रावधान है। नागरिक स्वयं भी ऑनलाइन अपील कर सकेगा।

30 दिन में करना होगा अपील का निस्तारण

प्रस्ताव के मुताबिक अपील पर अधिकतम 30 दिन के भीतर फैसला करना होगा। यदि जांच में सेवा देने में हुई देरी अनुचित पाई जाती है तो अधिकारी को निर्धारित अवधि में सेवा उपलब्ध कराने का आदेश दिया जा सकेगा।

बनेगा दिल्ली सेवा अधिकार आयोग

प्रस्तावित कानून के तहत दिल्ली सेवा अधिकार आयोग गठित किए जाने की बात कही गई है। आयोग अपीलों की सुनवाई के साथ-साथ कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी निभाएगा।

2011 के कानून की जगह लेगा नया कानून

नया कानून लागू होने के बाद दिल्ली में लागू 2011 के मौजूदा सेवा अधिकार कानून को समाप्त किए जाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य नागरिकों को सरकारी सेवाएं तय समयसीमा में उपलब्ध कराना और सेवा वितरण में जवाबदेही बढ़ाना है।

सरकारी काम लटकाने पर बढ़ेगी जवाबदेही

प्रस्तावित विधेयक लागू होने पर सरकारी सेवाओं में अनावश्यक देरी करने या आवेदन को अनुचित तरीके से खारिज करने पर अधिकारियों की वित्तीय जवाबदेही तय हो सकेगी। इससे नागरिकों को समयबद्ध सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।