दोस्ती के जाल में फंसाकर मानसिक रूप से कमजोर युवक से लाखों के गहने हड़पने का आरोप, दादी की चेन बदलने का भी दावा; दो पर एफआईआर

Hapur News :- हापुड़ के नगर कोतवाली क्षेत्र के संजय विहार मोहल्ले में एक मानसिक रूप से कमजोर युवक को कथित रूप से दोस्ती के जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करने और उसके माध्यम से घर से लाखों रुपये के सोने के गहने निकलवाने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार की शिकायत पर नगर कोतवाली पुलिस ने दो नामजद आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पीड़ित ओमवीर सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनके बेटे गर्वित के सिर में कुछ समय पहले गंभीर चोट लगी थी, जिसके कारण वह मानसिक रूप से कमजोर है। आरोप है कि मोहल्ले के रहने वाले मयंक और निहाल ने उससे दोस्ती कर परिवार का विश्वास जीत लिया और घर में उनका आना-जाना शुरू हो गया।

शिकायत के अनुसार, जब परिवार के सदस्य घर पर नहीं होते थे, तब दोनों आरोपी गर्वित से मिलने आते थे। आरोप है कि उन्होंने उसे सिगरेट पिलाकर उसका वीडियो बना लिया और बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर घर की अलमारी में रखे सोने के गहने निकलवा लिए। शिकायत में करीब तीन तोले की सोने की चेन, सोने का टीका, अंगूठी तथा अन्य आभूषण ले जाने का आरोप लगाया गया है।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपियों ने गर्वित की बुजुर्ग दादी के गले से असली सोने की चेन उतारकर उसकी जगह नकली चेन पहना दी। परिवार को इसकी जानकारी तब हुई, जब घर की अलमारी से गहने गायब मिले और पूछताछ के दौरान गर्वित ने कथित रूप से पूरी घटना बताई।

शिकायत के अनुसार, बाद में परिवार ने आरोपियों के परिजनों से संपर्क किया। पीड़ित का दावा है कि बातचीत के दौरान गहने वापस करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक गहने नहीं लौटाए गए। परिवार का आरोप है कि आरोपियों ने गहने बेच दिए हैं।

नगर कोतवाली पुलिस ने पीड़ित की तहरीर के आधार पर मयंक और निहाल के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। क्षेत्राधिकारी (सिटी) अनीता चौहान ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

नोट: यह समाचार पुलिस में दर्ज शिकायत और एफआईआर के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में वर्णित आरोप शिकायतकर्ता के हैं। मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने तथा न्यायिक प्रक्रिया से पहले किसी भी आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता।

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