
‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी से किया सतर्क, संदिग्ध APK फाइल और अनजान लिंक से बचने की सलाह
Hapur News: डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन कारोबार के बढ़ते दायरे के बीच साइबर अपराध भी नई चुनौती बनकर सामने आ रहे हैं। उद्यमियों और व्यापारियों को साइबर ठगी के बदलते तरीकों से जागरूक करने के उद्देश्य से इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) धीरखेड़ा, हापुड़ चैप्टर की ओर से मंगलवार को सोसायटी भवन में साइबर जागरूकता मंथन बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता चैप्टर चेयरमैन पवन शर्मा ने की।
कार्यक्रम में साइबर क्राइम थाना हापुड़ की टीम ने उद्यमियों को ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, संदिग्ध APK फाइल, फर्जी लिंक, पहचान छिपाकर की जाने वाली कॉल और तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर अपराधों के तरीकों से अवगत कराया। साथ ही साइबर ठगी होने की स्थिति में तत्काल शिकायत करने और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी सावधानियां अपनाने पर जोर दिया गया।
सरकारी अधिकारी बनकर डराते हैं साइबर ठग
बैठक में साइबर क्राइम थाना हापुड़ के प्रभारी मुनीष प्रताप सिंह अपनी टीम के साथ मौजूद रहे। उनके साथ एसआई सचिन कुमार, साइबर एक्सपर्ट दीपक कुमार और एसआई शालिनी सिंह ने उद्यमियों को साइबर अपराध से बचाव की जानकारी दी।
साइबर टीम ने बताया कि अपराधी कई बार खुद को बैंक, पुलिस या विभिन्न सरकारी एवं जांच एजेंसियों से जुड़ा अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करते हैं। डर और जल्दबाजी का माहौल बनाकर पीड़ित से बैंकिंग जानकारी हासिल करने या रुपये ट्रांसफर कराने की कोशिश की जाती है।
ऐसी स्थिति में किसी अनजान कॉल पर विश्वास करने के बजाय संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से स्वतंत्र रूप से सत्यापन करने की सलाह दी गई।
अनजान APK फाइल डाउनलोड करना पड़ सकता है भारी
साइबर विशेषज्ञों ने विशेष रूप से मोबाइल फोन पर आने वाली संदिग्ध APK फाइलों और अनजान एप्लीकेशन को लेकर सतर्क किया।
उन्होंने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर APK फाइल या संदिग्ध ऐप इंस्टॉल नहीं करना चाहिए। इसी तरह स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस की अनुमति देने से पहले भी अत्यधिक सावधानी जरूरी है।
ऐसे माध्यमों का दुरुपयोग कर साइबर अपराधी मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए OTP, PIN, CVV, पासवर्ड और अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम से डरें नहीं, पहले करें सत्यापन
बैठक में तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाली ठगी पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
साइबर टीम ने उद्यमियों को समझाया कि ठग वीडियो कॉल या फोन के माध्यम से पुलिस अथवा जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर गंभीर कानूनी कार्रवाई का भय दिखा सकते हैं। इसके बाद पीड़ित को लगातार कॉल पर रहने, किसी को जानकारी न देने और कथित जांच या सत्यापन के नाम पर रकम ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया जाता है।
उद्यमियों से कहा गया कि ऐसी धमकियों से घबराकर किसी खाते में पैसा ट्रांसफर न करें। संदिग्ध कॉल आने पर उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें और जरूरत पड़ने पर तत्काल पुलिस या साइबर क्राइम अधिकारियों से संपर्क करें।
उद्योगों के लिए भी साइबर सुरक्षा बेहद जरूरी
बैठक में बताया गया कि डिजिटल भुगतान, ई-मेल और ऑनलाइन बैंकिंग पर बढ़ती निर्भरता के कारण औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी हो गई है।
फर्जी ई-मेल, भुगतान संबंधी नकली संदेश, सप्लायर या कारोबारी सहयोगी की पहचान का दुरुपयोग और संदिग्ध भुगतान अनुरोध के जरिए कंपनियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है।
उद्यमियों को सलाह दी गई कि बड़ी रकम के भुगतान या बैंक खाते में बदलाव से संबंधित किसी ई-मेल अथवा संदेश पर तुरंत कार्रवाई करने के बजाय दूसरे विश्वसनीय माध्यम से उसकी पुष्टि जरूर करें।
कार्यालयों में मजबूत पासवर्ड, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट, सीमित एक्सेस और कर्मचारियों की साइबर सुरक्षा ट्रेनिंग जैसी व्यवस्थाओं को अपनाने पर भी जोर दिया गया।
साइबर ठगी होने पर तत्काल करें शिकायत
साइबर पुलिस ने बताया कि ऑनलाइन वित्तीय ठगी होने की स्थिति में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। पीड़ित को बिना देरी साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि संबंधित वित्तीय लेनदेन पर समय रहते कार्रवाई की संभावना बढ़ सके।
बैठक में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर तत्काल शिकायत करने और आवश्यक होने पर संबंधित साइबर पुलिस से संपर्क करने की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही पीड़ितों को संदिग्ध मोबाइल नंबर, ट्रांजैक्शन आईडी, बैंक विवरण, स्क्रीनशॉट, ई-मेल और चैट जैसे डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने की सलाह दी गई, ताकि जांच में मदद मिल सके।
IIA ने कहा—कर्मचारियों तक भी पहुंचाएं साइबर जागरूकता
IIA हापुड़ चैप्टर के चेयरमैन पवन शर्मा ने साइबर पुलिस टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डिजिटल दौर में साइबर सुरक्षा प्रत्येक उद्योग और नागरिक के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने उद्यमियों से साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी अपने कर्मचारियों, सहयोगियों और परिवार के सदस्यों तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सतर्कता के माध्यम से साइबर ठगी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बड़ी संख्या में उद्यमी रहे मौजूद
कार्यक्रम में सचिव लवलीन गुप्ता, कोषाध्यक्ष सौरभ अग्रवाल, सीईसी सदस्य शांतनु सिंहल, राष्ट्रीय सचिव विजय शंकर शर्मा, धीरज चुग, दिनेश अग्रवाल, विजेंद्र कुमार, प्रशांत शर्मा, आकाश शर्मा, शोभित गोयल, अक्षत अग्रवाल, आयुष गर्ग, तन्मय मित्तल, वैभव गुप्ता और पंकज शर्मा सहित बड़ी संख्या में उद्यमियों ने हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान साइबर पुलिस ने उद्यमियों से अपील की कि OTP, PIN, CVV और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें, अनजान लिंक या APK फाइल न खोलें, संदिग्ध वित्तीय अनुरोध की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें और साइबर ठगी होने पर बिना देरी शिकायत दर्ज कराएं।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में तकनीक के उपयोग के साथ साइबर जागरूकता और सतर्कता ही ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।