
मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड गांव में एक दबंग ने दलित महिला की हत्या कर उसकी बेटी का अपहरण कर मौके से फरार हो गया । घटना के बाद से ग्रामीणों में रोष है । घटना के बाद से गांव में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी है। घटना के बाद जब महिला का शव लेकर एम्बुलेंस गांव पहुंची, तो आक्रोशित ग्रामीणों ने उसमें तोड़फोड़ कर दी। पुलिस शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजना चाहती है, लेकिन परिजनों और ग्रामीणों ने शव उठाने से इनकार कर दिया है बाद में पुलिस अफसरों के समझाने पर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया ।लेकिन जैसे ही दलित नेता योगेश वर्मा ने सैंकड़ों लोगों के साथ पीएम हाउस घेर लिया । आरोपी और पीड़ित परिवार एक ही गांव के निवासी हैं। पुलिस ने अपहरण और हत्या के आरोपी के दादा-दादी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि आरोपी के माता-पिता और भाई घटना के बाद से फरार हैं। घटना सरधना थाना क्षेत्र की है। यहां रहने वाले सत्येंद्र कुमार मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार में पत्नी सुनीता, तीन बेटे और एक बेटी रुबी है। आर्थिक तंगी के चलते रुबी को करीब ढाई साल पहले पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। परिवार में उसके रिश्ते को लेकर बातचीत चल रही थी। रुबी तीसरे नंबर पर है और सबसे छोटा भाई अविवाहित है । घटना के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने (X) के जरिए इस घटना का जिक्र करते हुए सरकार और सिस्टम पर तंज कसा है ।
बताया जा रहा है कि सुनीता बृहस्पतिवार की सुबह अपनी बेटी रुबी के साथ खेत जा रही थीं। रास्ते में पहले से मौजूद आरोपी कंपाउंडर पारस ने दोनों को रोक लिया और बदतमीजी करने लगा।
जब सुनीता ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने गाली-गलौज शुरू कर दी और फरसे से महिला के सिर पर हमला कर दिया। इसके बाद वो लड़की को जबरन बाइक पर बैठाकर फरार हो गया।
महिला के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और गंभीर रूप से घायल सुनीता को मोदीपुरम स्थित एसडीएस ग्लोबल हॉस्पिटल ले जाया गया। सिर में गहरी चोट के चलते डॉक्टर ऑपरेशन की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई।
मौत से पहले सुनीता ने बयान दिया था कि हमला होते ही वो मौके पर गिर गई थी और इसके बाद आरोपी उसकी बेटी को जबरन उठाकर ले गया।

अस्पताल के मैनेजर मनोज ने बताया कि महिला की हालत बेहद नाजुक थी। ऑपरेशन से पहले ही उसकी मौत हो गई, बीपी लगातार गिर रहा था और स्थिति स्थिर नहीं हो पा रही थी।
आरोपी की पहचान पारस के रूप में हुई है जो कि गांव में ही एक डॉक्टर के यहां कंपाउंडर का काम करता है। बताया जा रहा है कि आरोपी और लड़की एक-दूसरे को पहले से जानते थे।
पारस तीन भाइयों में सबसे छोटा है। घटना के बाद से उसके माता-पिता और दोनों भाई फरार हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और अपहृत लड़की की तलाश की जा रही है।