
परिवर्तन संस्था द्वारा राजा हरिश्चंद्र भवन कुटी चौराहा शास्त्री नगर मेरठ में ‘फुले अम्बेडकर रेव्यूलेशन सेमिनार का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष वेदवीर सिंह आदिवासी ने की तथा संचालन पंकज दास ने किया। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि संस्था प्रमुख चौ० विनोद अम्बेडकर जी मौजूद रहे। श्रीमती पिंकी अम्बेडकर (अध्यक्ष महिला विंग) हरप्रकाश राव, राजीव ऊंटवाल, वेदप्रकाश सागर, विशिष्ट अतिथि रहे। सेमिनार का प्रारंभ फुले अम्बेडकर के चित्र के सम्मुख पुष्प अर्पित कर संस्था के समूहगान से हुआ।
सेमिनार में मुख्य अतिथि संस्था प्रमुख चौ० विनोद अम्बेडकर ने कहा कि ऊंच नीच छुवाछूत भेदभाव गैरबराबरी की जातिवादी व्यवस्था के विरुद्ध एवं शिक्षा समानता और बंधुत्व के वाहक थे फुले और अम्बेडकर। वो खुद भी इस व्यवस्था के शिकार हुवे थे इसलिए इन्होंने शिक्षा संगठन और संघर्ष के मूवमेंट को समाज में खड़ा कर वैचारिक क्रांति की। वो खुद आजीवन अभावग्रस्त जीवन जिए तब जाकर आज हमें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला है। हर क्षेत्र में जो उन्नति आज हम कर पाए यह सब महापुरुषों के त्याग बलिदान की वजह से संभव हो सका। उनके त्याग बलिदान संघर्ष का समाज सदैव ऋणी रहेगा। संस्था प्रमुख ने आगे कहाकि महापुरुषों के आंदोलन को ईमानदारी से चलाया जाना चाहिए था जो मान्यवर कांशीराम साहब के बाद थम सा गया है फिलवक्त भारत में फुले आंबेडकर के मूवमेंट को पूरी ईमानदारी से देशभर में अराजनैतिक तौर पर परिवर्तन संस्था चला रही है शेष तो सब उनके नाम पर राजनीति चल रही है।
महिलविंग की अध्यक्ष श्रीमती पिंकी अम्बेडकर ने कहाकि फुले आंबेडकर को महान बनाने में तथा उनके द्वारा जो रेव्यूलेशन किया गया उसमें उनकी जीवन संगनी माता सावित्री एवं माता रमाबाई का बहुत बड़ा योगदान था जिन्हें समाज के लोग स्मरण नहीं करते। माता सावित्रीबाई ने ज्योतिबा फुले का का साथ देते हुवे आजीवन संतान पैदा ना करने तथा वंचित समाज में जाकर पढ़ाने का कठोर संकल्प लिया वहीं माता रमाबाई ने तो हर कदम बाबा साहेब का साथ देते हुवे अपने चार बच्चे और खुद को आंदोलन की भेंट चढ़ा दिया। ऐसी त्यागमूर्ति माता सावित्री और माता रमाबाई ना होती तो शायद फुले अम्बेडकर इतनी ऊंचाई ना छू पाते और समाज की स्तिथि भयावह होती
अपने अध्यक्षनीय संबोधन में केंद्रीय अध्यक्ष वेदवीर सिंह आदिवासी ने कहा कि दलित समाज के उत्थान हेतु सामाजिक क्रांति का जो आंदोलन फुले ने चलाया उसे आंबेडकर ने परवान चढ़ाया। बाबा साहेब के बाद आंदोलन की बागडोर मान्यवर कांशीराम ने संभाली और बहुत आगे तक लेकर गए उनके बाद समाज में अनेक ऐसे स्वार्थी नेताओं का जन्म हुआ जिसकी वजह से फुले आंबेडकर मिशन बहुत कमजोर पड़ गया किंतु इसी बीच पुनः सामाजिक ईमानदार, साहसी, त्याग बलिदान परिश्रम को सदैव तत्पर, हमेशा गतिशील परिवर्तन संस्था के नेतृत्वकृता चौ० विनोद अम्बेडकर आशा की एक किरण के रूप में हमारे बीच फुले अम्बेडकर मूवमेंट को चला रहे समाज को उनके मार्गदर्शन में एकजुट होना चाहिए।
सेमिनार में मुख्यरूप से पंकज दास, सोनू टांक, राजकुमार कल्याण, पवन वेद, मनोज वर्मा, सुजल भाटिया, मोहित मोंगिया, संजीव कुमार, अंकुश कुमार, विक्की, छोटे, कवरवीर सिंह, संजय कुमार, बिजेंद्र सागर कु० कनक अम्बेडकर,मनोज कुमार आदि स्त्री पुरुष शामिल रहे