
भरत गुप्ता, हापुड़। “सांसद जी, मैं क्या सच में आपको भूत लग रही हूं? देखिए, मैं आपके सामने खड़ी हूं—ये रहे मेरे जीवित होने के प्रमाण।”
73 वर्षीय बुज़ुर्ग महिला की यह पीड़ा भरी बात सुनते ही मौके पर मौजूद सांसद कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए। मामला संज्ञान में आते ही उन्होंने वहीं से जिलाधिकारी को फोन कर स्पष्ट निर्देश दिए कि वृद्धा की पेंशन तुरंत बहाल कराई जाए।
महज कुछ मिनटों में घटे इस घटनाक्रम ने जिले की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अंत में सांसद को हाथ जोड़कर वृद्धा को भरोसा दिलाना पड़ा—“माता जी, आपकी समस्या का समाधान होगा।”
जीवित महिला को रिकॉर्ड में मृत दर्शाया गया
यह मामला धनौरा गांव की रहने वाली कुसुम त्यागी (उम्र 73 वर्ष) से जुड़ा है। शनिवार को नगर पालिका में कंबल वितरण कार्यक्रम के बाद सांसद डायट परिसर में चल रहे कार्यों के निरीक्षण के लिए जा रहे थे। इसी दौरान संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंचीं कुसुम त्यागी ने एसडीएम कार्यालय के पास उन्हें रोक लिया।
वृद्धा ने दस्तावेज दिखाते हुए बताया कि पिछले तीन वर्षों से वह सरकारी कार्यालयों और बैंक के चक्कर काट रही हैं, लेकिन उनकी वृद्धावस्था पेंशन चालू नहीं हो पा रही। कागजों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है, जबकि वह जीवित हैं और स्वयं सांसद के सामने खड़ी हैं।
2022 के बाद से नहीं मिली एक भी किस्त
कुसुम त्यागी को आखिरी बार वर्ष 2022 में पेंशन मिली थी। इसके बाद भुगतान पूरी तरह बंद हो गया। पति का पहले ही निधन हो चुका है, ऐसे में जीवन-यापन के लिए पेंशन ही उनका एकमात्र सहारा थी, जो छिन जाने से उनका संकट और गहरा गया।
सांसद की पहल, प्रशासन हरकत में
मामला उजागर होते ही सांसद ने जिलाधिकारी से सीधे बात की। जिलाधिकारी ने स्वयं पीड़िता के भाई दीपचंद त्यागी से संपर्क कर स्थिति जानी और शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
परिजन के अनुसार, प्रशासन ने घर पर कर्मचारी भेजकर प्रक्रिया पूरी कराने का भरोसा दिलाया है।
सबसे अहम सवाल—तीन साल की बकाया राशि का क्या?
अब बड़ा प्रश्न यह है कि यदि पेंशन बहाल भी हो जाती है, तो बीते तीन वर्षों की बकाया राशि का भुगतान कौन करेगा? क्या किसी स्तर पर हुई लापरवाही की जिम्मेदारी तय होगी, या फिर यह मामला भी केवल आश्वासनों तक सिमट जाएगा?
यह घटना न केवल एक बुज़ुर्ग महिला की पीड़ा को उजागर करती है, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड और संवेदनहीन प्रक्रिया की कठोर सच्चाई को भी सामने लाती है।