
मेरठ में रविवार को 35 साल पुराने तीन मंजिला कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर चला दिया गया। करीब 288 वर्गमीटर में बने इस कॉम्प्लेक्स में 22 दुकानें थीं। जैसे ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई, कारोबारी और उनके परिवार के सदस्य रोने लगे। कई महिलाएं अधिकारियों से हाथ जोड़कर बुलडोजर रुकवाने की मिन्नतें करती रहीं।
कॉम्प्लेक्स की एक दुकान ‘अलंकार साड़ी सूट्स’ के मालिक और उनकी पत्नी सुबह से ही अपनी दुकान के सामने कुर्सी पर बैठे रहे। जब उनकी दुकान जमींदोज हुई, तो पूरा परिवार फफक पड़ा। उनका कहना था कि यही दुकान उनके परिवार की आजीविका का सहारा थी।
आवास विकास परिषद के डिप्टी हाउसिंग कमिश्नर अनिल कुमार सिंह ने बताया कि इसी क्षेत्र की 31 और दुकानों को भी नोटिस जारी किए गए हैं, जो आवासीय प्लॉट पर बनाई गई हैं। इससे नाराज व्यापारियों ने बाजार बंद कर प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया और सेंट्रल मार्केट बंद रखने का ऐलान किया।

शनिवार सुबह 11 बजे से ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें पहले दिन 40 प्रतिशत हिस्सा गिराया गया। रविवार को कार्रवाई फिर शुरू की गई। मौके पर भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात रही, जबकि ड्रोन से निगरानी की गई। दो पोकलेन और चार बुलडोजरों से पिलर कमजोर करने के बाद पूरा कॉम्प्लेक्स भरभरा कर गिर गया।
यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई। दरअसल, यह जमीन मूल रूप से काजीपुर निवासी वीर सिंह को आवास के लिए आवंटित की गई थी, लेकिन 1990 में विनोद अरोड़ा ने पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से यहां अवैध कॉम्प्लेक्स बना लिया। कोर्ट ने 17 दिसंबर 2024 को इसे तीन महीने में खाली कर ध्वस्त करने का आदेश दिया था। आदेश की अवहेलना पर याचिकाकर्ता लोकेश खुराना ने अवमानना याचिका दायर की। इसी कारण प्रशासन ने अंतिम समय पर कार्रवाई की।