
हापुड़— योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति उस समय में फेल होती नजर आई जब एक लेखपाल ने किसान से खतौनी में नाम दर्ज करने के नाम पर दस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गई। जिसके बाद योगी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ नीति पर कार्य का दावा करने वाले जिले के अधिकारियों में हड़कम्प मच गया। जिले में आए दिन उजागर हो रहे भ्रष्टाचार के मामलों से सरकार की हो रही छवि धूमिल जिले के लोगों के लिए आम बात सी होती नजर आ रही। वही अधिकारी भी ऐसी घटनाओं के आदि होते नजर आ रहे है, या जिले के कर्मचारी बेखौफ होकर भ्रष्टाचार कर रहे है। जिसको लेकर तरह—तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।
आपको बता दें कि अभी जिले के लोग बिजली विभाग में फैले भ्रष्टाचार को लेकर हुए धरना—प्रदर्शन को अभी लोग भूला नही पाये थे। जिसके भ्रष्टाचार के वीडियो भी जमकर सोशल मीडिया पर वायरल हुए। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम की एमडी ईशा दुहन ने जांच के बाद भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बडे पैमाने पर कार्रवाई कर उन्हें सस्पेंड व निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दे दिए। वही नगर पालिका परिषद में जेई को एंटी करप्शन टीम ने 2 लाख 30 हजार रुपये की रिश्वत के साथ गिरफतार किया था। वन विभाग के डिप्टी रेंजर को भी एंटी करप्शन टीम ने 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रगें हाथों पकड़ा था। गढमुक्तेश्वर तहसील में रिश्वत खोर कर्मचारी का ये कोई पहला माला नही हैं पूर्व एंटी करप्शन टीम ने दो लेखपालों को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए पकड़ा था।गांव डहरा रामपुर के एक किसान के दाखिल खारिज कराने के नाम पर 50 हजार रुपये मांगने पर भी एंटी करप्शन टीम ने लेखपाल को दबोचा था।वही जिले में रसूकदार लेखपालों में शुमार अधिकारियों खासी पकड़ रखने वाले साबिर हसन के रिश्वत लेने के वायरल वीडियो ने एक बार फिर सरकार के साथ—साथ जिला प्रशासन की छवि को धूमिल कर दिया है। वायरल वीडियो में गढमुक्तेश्वर तहसील में तैनात लेखपाल साबिर हसन व उसके सहयोगी का किसान से खतौनी में नाम दर्ज कराने के एवज में दस हजार रुपये की रिश्वत लेने का वीडियो वायरल हो गया। जिसके बाद तहसील प्रशासन के साथ—साथ जिला प्रशासन में भी हड़कम्प मच गया। पिछले एक वर्ष में भ्रष्टाचार के कई मामलों को लेकर जिला सुर्खियों बना हुआ हैं। जिससे योगी सरकार जीरो टॉलरेंस नीति भी शर्मसार होती नजर आ रही है। उक्त रिश्वत कांड वायरल वीडियो पर एसडीएम का कहना है कि उन्होंने तहसीलदार को मामले की जांच के आदेश दे दिए है। जांच के बाद लेखपाल पर कार्रवाई की जायेगी।