
● 108 साल की उम्र में ली आखिरी सांस
● गंगा किनारे आश्रम में आज दी जाएगी समाधि
● गंगा किनारे समेत देश की राजधानी में चल रहा हैं आश्रम
गढ़मुक्तेश्वर – गंगा किनारे समेत देश की राजधानी में तीन आश्रम चलाकर सैकड़ों गरीब निराश्रितों की सेवा करते आ रहे संत के संसार से विदा होने पर क्षेत्र में हर तरफ शोक की लहर दौड़ गई। देश की राजधानी दिल्ली के गौतमपुरी और ओखला समेत गढ़ की साइड में स्थित गांव लठीरा में कई दशकों से वृद्धाश्रम का संचालन करते आ रहे 108 वर्षीय संत श्री विश्राम मानव गुरुवार की दोपहर को संसार से विदा हो गए। जिन्होंने गंगा किनारे स्थित आश्रम में अंतिम सांस ली तो सेवादारों समेत वहां रह रहे तीन सौ से भी अधिक गरीब बेहसहाराओं की आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली। इस दौरान संत विश्राम भगत के पुत्र डॉ.जीपी भगत, पौत्र सौरभ भगत, आश्रम सेवादार फारूक चौधरी, हेल्थ ऑफिसर डॉ.शमशाद भी मौके पर मौजूद थे। सूचना मिलते ही लठीरा और गढ़ समेत आसपास के गांवों से महिला बच्चों समेत हजारों की भीड़ संत के अंतिम दर्शन करने को उमड़ पड़ी। डॉ.जीपी भगत ने बताया कि उनके दिवंगत पिता को आज गंगा किनारे आश्रम परिसर में समाधि दी जाएगी, जहां गरीब बेसहाराओं के साथ ही बड़ी संख्या में दिल्ली समेत आसपास के राज्यों के अनुयाई मौजूद रहेंगे। खाने और रहने के साथ ही सभी जरूरत की जाती हैं पूरी दिल्ली और गढ़ गंगा किनारे संचालित हो रहे आश्रमों में जीवन के अंतिम दिन बिता रहे गरीब बेसहाराओं की तादाद वर्तमान में एक हजार की करीब है। जिन्हें खाना, कपड़े, चिकित्सा के साथ ही अन्य सभी जरूरी सुविधा पूरी तरह निशुल्क ढंग में मुहैया कराई जाती हैं। जिनकी सेवा के लिए दर्जनों कर्मचारियों के साथ ही रसोईया और चिकित्सक तैनात हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पौत्र भी रहे थे आश्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पौत्र कन्नू भाई ने दक्षिण अफ्रीका से वापस लौटने के बाद दिल्ली के गौतमपुुरी आश्रम में काफी दिन बिताए थे, जिसके उपरांत उन्होंने गढ़ गंगा किनारे आश्रम में भी कई दिनों तक ठहराव किया था।