प्राधिकरण का नोटिस के नाम पर लाखों का खेल, नियम-कानून हुए फेल!


हापुड़:— उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है और जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अधिकारियों व कर्मचारियों को निष्पक्ष रूप से कार्य करने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। बावजूद इसके, जिले के प्राधिकरण विभाग में तैनात अधिकारी इन नियमों को ताक पर रखकर मनमानी करते नजर आ रहे हैं। अवैध कॉलोनियों और भवनों पर नोटिस जारी करने के नाम पर लाखों का खेल खेला जा रहा है, लेकिन कार्रवाई की जगह केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जिले में कई अवैध कॉलोनियों एवं नियम विरुद्ध निर्माणाधीन भवनों को प्राधिकरण की मिलीभगत से कार्य चल रहा है। जिससे सरकार की जीरो टॉलरेंसी नीति की जमकर धज्जियां उड़ रही है,वही विभाग को भी लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। जब प्राधिकरण में बैठे जिम्मेदारों पर सरकार की सख्ती और साख पर सवाल उठने लगते है,तो  इन पर कार्रवाई करने के नाम पर बड़े रसूखदारों को बचाने का खेल शुरू हो गया। छोटे और कमजोर तबके के लोगों पर तो शिकंजा कस दिया जाता है, लेकिन प्रभावशाली लोगों के अवैध निर्माणों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। स्थिति यह है कि प्राधिकरण विभाग के अधिकारी सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति की अनदेखी करते हुए आंखों पर पट्टी बांधे बैठे हैं, ठीक वैसे ही जैसे महाभारत में गंधारी ने सत्य को देखने से इनकार कर दिया था। इन अधिकारियों को न तो सरकारी दिशा-निर्देशों की परवाह है और न ही प्राधिकरण के नियम कानून की। प्रश्न यह उठता है कि क्या सरकार इस भ्रष्टाचार पर कब तक अंकुश लगाएगी या फिर प्राधिकरण की यह मनमानी यूं ही चलती रहेगी? जिले के लोग अब सरकार से उम्मीद कर रहे हैं कि वह इस खेल को खत्म कर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करे, ताकि योगी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन का सपना साकार हो सके। अधिकारी कहिन – प्राधिकरण के प्रभारी सचिव प्रवीण गुप्ता का कहना कि सरकार की नीति एवं मंशा के अनुरूप कार्य करने के निर्देश सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दिए गये है। अवैध निर्माणों व कालौनियां काटने वाले के खिलाफ भी कड़ी कार्यवाही करते हुए उनके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है। रटा रटाया जवाब

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