
नई दिल्ली। पेगासस जासूसी मामला, महँगाई और किसानों के मुद्दों पर विपक्षी दलों के हँगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही आज पूरे दिन बाधित रही और नौ बार के स्थगन के बाद अंतत: कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
कम से कम हाल के कुछ वर्षों में एक ही दिन में सदन की कार्यवाही इतनी बार स्थगित नहीं हुई थी। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वामदल, आम आदमी पार्टी, शिरोमणी अकाली दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी समेत कई विपक्षी दल पेगासस जासूसी, किसानों और पिछले साल संसद से पारित कृषि कानूनों तथा महँगाई को लेकर मानसून सत्र के पहले दिन से ही सदन में हँगामा कर रहे हैं।
नौ बार के स्थगन के बाद शाम 4.30 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य एक बार फिर हँगामा करने लगे। वे अपनी माँगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुये, हाथों में तख्तियाँ लिये अध्यक्ष के आसान के समीप आ गये। पीठासीन सभापति राजेंद्र अग्रवाल ने शोर-शराबे के बीच ही जनता दल यूनाइटेड की कविता सिंह और तेलुगुदेशम् पार्टी के जयदेव गल्ला को नियम 377 के तहत उनकी बात रखने का मौका दिया।
श्री अग्रवाल ने नारेबाजी कर रहे सदस्यों से उनकी सीटों पर वापस जाने की अपील की और कहा कि वे दूसरे सदस्यों को उनकी बात कहने दें। उन्होंने विपक्षी सदस्यों को बार-बार समझाने की कोशिश की, लेकिन उनकी अपील का जब कोई असर नहीं हुआ तो उन्होंने सदन की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। मानसून सत्र के दौरान विपक्षी सदस्यों के लगातार हँगामे के कारण अब तक एक दिन भी सदन में सही से कामकाज नहीं हो सका है। जो थोड़ा-बहुत कामकाज हुआ भी है तो वह भी शोर-शराबे के बीच। इस सत्र में लोकसभा ने अब तक दो विधेयक पारित किये हैं, लेकिन चर्चा किसी पर नहीं हो सकी। अब तक छह बैठकों में से एक भी दिन प्रश्नकाल पूरा नहीं हो सका है और न ही किसी मुद्दे पर चर्चा हुई है।