
मेरठ – उद्यमी फाउंडेशन द्वारा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को उद्यमिता के अवसरों, सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता से अवगत कराना था। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने नवोदित उद्यमियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभों के बारे में जानकारी दी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में डिप्टी कमिश्नर, इंडस्ट्रीज दीपेंद्र कुमार ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) और ओडीओपी क्रेडिट स्कीम जैसी सरकारी पहलों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
● नाबार्ड की भूमिका और उद्यमिता के अवसर
सेमिनार में नाबार्ड – राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक की जिला विकास प्रबंधक भावना जैन मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने नाबार्ड द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के विकास में निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नाबार्ड न केवल स्टार्टअप्स और ग्रामीण व्यवसायों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण और संसाधनों से भी सशक्त बनाता है।
भावना जैन ने विशेष रूप से नवोदित उद्यमियों को इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया और बताया कि कैसे वे अपने आसपास की समस्याओं को पहचानकर नवाचार के माध्यम से उन्हें हल कर सकते हैं। उन्होंने छोटे व्यवसायों को समर्थन देने की विभिन्न पहलों के बारे में भी विस्तार से बताया।
● स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता
कार्यक्रम में मेरठ उद्यमी फाउंडेशन की सीईओ डॉ. माधुरी गुप्ता, एमआईटी के निदेशक प्रो. डॉ. केएलए खान और इनक्यूबेशन मैनेजर अदनान की सक्रिय भूमिका रही। इसके अलावा, कार्यक्रम के समन्वय में ई-सेल, एमआईटी के सदस्य राधिका कसाना, आदर्श शुक्ला और अमित कुमार का विशेष योगदान रहा। मेरठ उद्यमी फाउंडेशन ने भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन कर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
● युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
इस आयोजन के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि युवाओं के लिए सरकारी योजनाओं की सही जानकारी और सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है। इस तरह के सेमिनार न केवल स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देते हैं, बल्कि नवोदित उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनने की दिशा में भी प्रेरित करते हैं।