मासूम पोती व भाभी के हत्यारे ने जेल में की आत्महत्या

हापुड़: 31 जनवरी 2017 बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के गांव नूरपुर में हुई ह्दय विदारक घटना ने ग्रामीणों की रूह कंपा दी थी। दादा ने अपनी डेढ़ माह की पोती के बलकटी से टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे। पड़ोसी महिला को भी मौत के घाट उतार दिया था। इस मुकदमें में सजा काट रहे आरोपित ने गाजियाबाद के डासना जेल में आत्महत्या कर ली है। देर शाम स्वजन उसका शव लेकर गांव पहुंचे।

जहां शव का अंतिम संस्कार किया गया।बता दें कि गांव नूरपुर निवासी विपिन (61) के पुत्र राहुल की शादी वर्ष 2016 में मेरठ जिले के गांव भराला निवासी सुहानी से हुई थी। वर्ष 2017 में सुहानी ने नन्ही परी आश्वी को जन्म दिया था। पौत्री पैदा होने से विपिन डिप्रेशन का शिकार हो गया था। 31 जनवरी की दोपहर वह खेत से घर आया था। उसने पत्नी गीता व पुत्रवधू सुहानी से खाना बनाने के लिए कहा था।

इसी बीच वह सुहानी के कमरे में पहुंच गया। जहां उसने चैन की नींद सो रही डेढ़ माह की मासूम आश्वी के बलकटी से टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे।

इसी बीच विपिन ने अपनी पत्नी गीता पर बलकटी से वार कर उसे लहूलुहान कर दिया था। जबकि सुहानी को मारने के लिए भी दौड़,मगर उसने घर के बाहर निकलकर शोर मचा दिया था। शोर सुनकर पड़ोस में रहने वाली विपिन की भाभी सीमा (39) ने मौके पर पहुंची थी।

उसने बलकटी छीनने का प्रयास किया। इसी बीच उसने ने सीमा की गर्दन भी बलकटी से काट दी थी। विपिन ने भांजे प्रिंस की भी हत्या का प्रयास किया था। लेकिन वह बाल-बाल बच गया था।तत्कालीन सीओ एसपी दुबे, थाना बाबूगढ़ प्रभारी यतेंद्र कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच थे और विपिन को गिरफ्तार कर आला कत्ल बरामद किया था।

इस मामले में विपिन जनपद गाजियाबाद के डासना स्थित जिला कारागार में सजा काट रहा था। शनिवार तड़के उसका शव कारागार स्थित शौचालय में फांसी के फंदे से लटका मिला है। एसपी दीपक भूकर ने बताया कि गाजियाबाद पुलिस व जेल प्रशासन द्वारा मिली जानकारी के अनुसार विपिन ने आत्महत्या की है।

तारीख पर हापुड़ कचहरी आया था विपिन-

– राहुल ने बताया कि शुक्रवार को मुकदमे की तारीख के चलते पुलिस पिता विपिन को हापुड़ कचहरी लेकर आई थी। लेकिन, परिवार का कोई भी सदस्य उनसे नहीं मिला। केस में जल्द ही न्यायाधीश निर्णय भी सुनाने वाले थे। लेकिन, भगवान ने पुत्री को इंसाफ पहले ही दे दिया है। उसकी पुत्री के हत्यारे के शव को मुखाग्नि देकर उसे पुत्र धर्म को भी निभाना है। लेकिन, पिता की मौत का उसे कोई दुख नहीं है।

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