हापुड़ के 50 साल पुराने जाम को मिला रास्ता, गंगा एक्सप्रेसवे ने बदली तस्वीर; अब हर पर्व पर जाममुक्त सफर की उम्मीद

ब्रजघाट और हापुड़ की यातायात व्यवस्था के लिए लंबे समय से चुनौती बने जाम से अब राहत की उम्मीद जगी है। गंगा स्नान पर्वों के दौरान ब्रजघाट में लगने वाला 20 से 30 किलोमीटर लंबा जाम वर्षों से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण रहा है। घंटों तक हाईवे पर फंसे वाहन और रेंगता यातायात हर बड़े पर्व की तस्वीर बन चुके थे। इस बार गंगा एक्सप्रेसवे को वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल करते हुए किए गए रूट डायवर्जन से यातायात व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला।

गंगा एक्सप्रेसवे की ओर यातायात का दबाव शिफ्ट किए जाने के बाद मुख्य हाईवे पर वाहनों की रफ्तार अपेक्षाकृत बनी रही। इससे यह उम्मीद मजबूत हुई है कि भविष्य में बड़े गंगा स्नान पर्वों के दौरान गंगा एक्सप्रेसवे को यातायात प्रबंधन की रणनीति में प्रभावी रूप से शामिल किया जा सकता है।

पांच दशक से जाम बनी थी बड़ी समस्या

ब्रजघाट में गंगा स्नान पर्वों का सीधा असर हापुड़ की यातायात व्यवस्था पर पड़ता रहा है। दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु वाहनों से ब्रजघाट पहुंचते हैं। वाहनों का दबाव बढ़ते ही हाईवे पर यातायात की रफ्तार कम होने लगती है और देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।

कई अवसरों पर जाम 20 से 30 किलोमीटर तक फैल चुका है। हजारों वाहन घंटों तक फंसे रहने के कारण यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है। बुजुर्गों, बच्चों, मरीजों और जरूरी काम से यात्रा करने वाले लोगों के लिए स्थिति और मुश्किल हो जाती है।

पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती, बैरिकेडिंग और अस्थायी रूट डायवर्जन के बावजूद इस समस्या का स्थायी समाधान अब तक चुनौती बना रहा है।

एक डायवर्जन ने दिखाई नई उम्मीद

इस बार गंगा एक्सप्रेसवे को वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल करने से मुख्य हाईवे पर यातायात का दबाव कम रखने में मदद मिली। वाहनों को जरूरत के अनुसार वैकल्पिक मार्ग पर भेजे जाने से हाईवे पर यातायात अपेक्षाकृत सुचारू बना रहा।

इस व्यवस्था ने यह संकेत दिया है कि यदि भारी यातायात को समय रहते वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराया जाए तो ब्रजघाट और आसपास के हाईवे को पूरी तरह जाम होने से बचाया जा सकता है।

अब चर्चा केवल एक पर्व के दौरान यातायात व्यवस्था सफल रहने तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि क्या इसी मॉडल को भविष्य में प्रत्येक बड़े गंगा स्नान पर्व और अन्य भीड़भाड़ वाले आयोजनों के दौरान नियमित यातायात व्यवस्था का हिस्सा बनाया जा सकता है।

लोगों को अब हर पर्व पर चाहिए जाम से आजादी

स्थानीय लोगों और यात्रियों की उम्मीद अब एक दिन की राहत तक सीमित नहीं है। लोगों की मांग है कि गंगा स्नान, पूर्णिमा, अमावस्या, कार्तिक पूर्णिमा और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान पहले से यातायात का आकलन कर वैकल्पिक मार्ग तैयार रखा जाए।

यदि गंगा एक्सप्रेसवे को जरूरत के अनुसार नियमित रूप से वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जाता है तो हापुड़ के अलावा दिल्ली, मेरठ और आसपास के जिलों से ब्रजघाट आने-जाने वाले लोगों को भी राहत मिल सकती है।

जाम लगने के बाद नहीं, पहले से बने रणनीति

अब तक यातायात व्यवस्था का बड़ा हिस्सा जाम लगने के बाद उसे खुलवाने पर केंद्रित रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे के विकल्प ने जाम लगने से पहले ही यातायात के दबाव को नियंत्रित करने की संभावनाएं बढ़ाई हैं।

भारी वाहनों और श्रद्धालुओं के वाहनों का दबाव बढ़ने से पहले उन्हें वैकल्पिक मार्ग पर भेजना, प्रमुख चौराहों और संपर्क मार्गों पर पुलिस बल तैनात करना तथा वाहन चालकों को पहले से डायवर्जन की जानकारी देना भविष्य की रणनीति का हिस्सा बनाया जा सकता है।

वैकल्पिक मार्ग पर भी बढ़ेगा दबाव, तैयारी जरूरी

हालांकि किसी भी वैकल्पिक मार्ग को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखने के लिए उसकी क्षमता और यातायात दबाव का भी आकलन जरूरी होगा। यदि मुख्य हाईवे से बड़ी संख्या में वाहन गंगा एक्सप्रेसवे पर भेजे जाते हैं तो वहां भी यातायात प्रबंधन के पर्याप्त इंतजाम करने होंगे।

इसके लिए पहले से डायवर्जन प्लान तैयार रखने, पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती, स्पष्ट दिशा-सूचक बोर्ड और वाहन चालकों को समय रहते सूचना उपलब्ध कराने की आवश्यकता होगी।

अब असली परीक्षा व्यवस्था को नियमित बनाने की

एक सफल डायवर्जन निश्चित रूप से राहत देने वाला संकेत है, लेकिन इसे स्थायी समाधान तभी माना जा सकेगा जब बड़े पर्वों के दौरान यह व्यवस्था लगातार प्रभावी साबित हो।

इसके लिए प्रशासन को पर्वों से पहले यातायात का अनुमान लगाकर वैकल्पिक मार्ग की क्षमता, पुलिस बल, बैरिकेडिंग, संकेतक और आपातकालीन व्यवस्थाओं की समीक्षा करनी होगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि यातायात का दबाव मुख्य हाईवे से हटकर किसी दूसरे मार्ग पर जाम का कारण न बने।

पांच दशक पुरानी समस्या को मिल सकता है नया समाधान

ब्रजघाट का जाम हापुड़ के लिए केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही चुनौती है। हर पर्व पर जाम, नई व्यवस्था और उसके बाद फिर वही समस्या—यह सिलसिला वर्षों से जारी रहा है।

गंगा एक्सप्रेसवे पर किए गए यातायात डायवर्जन ने यह उम्मीद जरूर जगाई है कि समस्या का समाधान केवल अतिरिक्त पुलिस बल या अस्थायी डायवर्जन में नहीं, बल्कि वैकल्पिक यातायात नेटवर्क के बेहतर इस्तेमाल में भी है।

अब देखना यह होगा कि गंगा एक्सप्रेसवे को केवल जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जाता है या बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान इसे स्थायी यातायात प्रबंधन योजना का हिस्सा बनाया जाता है।

यदि यह मॉडल लगातार सफल रहता है तो वर्षों से जाम से जूझ रही हापुड़ की यातायात व्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।

अब उम्मीद सिर्फ जाम खुलने की नहीं, जाम न लगने की है।

Please follow and like us: