पिलखुवा में विवाहिता ने पति और ससुराल पक्ष पर मारपीट का लगाया आरोप, जान बचाकर पहुंची कोतवाली; पुलिस जांच में जुटी

हापुड़ के पिलखुवा क्षेत्र में एक विवाहिता ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि रविवार को कथित मारपीट के बाद वह किसी तरह घर से निकलकर सीधे पिलखुवा कोतवाली पहुंची और पुलिस से मदद मांगी। पुलिस ने महिला का चिकित्सकीय परीक्षण (मेडिकल) कराते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।

शादी के बाद से प्रताड़ना का आरोप

पुलिस को दी गई तहरीर में गौतमबुद्ध नगर जनपद निवासी महिला ने बताया कि लगभग तीन वर्ष पहले उसकी शादी पिलखुवा क्षेत्र में हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विवाह के कुछ समय बाद से ही पति और ससुराल पक्ष के लोग उसके साथ मारपीट, गाली-गलौज और मानसिक प्रताड़ना करते रहे।

पीड़िता का कहना है कि पारिवारिक स्तर पर कई बार समझौते के प्रयास हुए, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

रविवार को मारपीट और धमकी देने का आरोप

महिला का आरोप है कि रविवार को पति और अन्य ससुराल पक्ष के लोगों ने उसके साथ मारपीट की। शिकायत में यह भी कहा गया है कि घटना के दौरान उसे गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकी दी गई।

पुलिस मामले में लगाए गए सभी आरोपों की जांच कर रही है।

कोतवाली पहुंचकर मांगी मदद

पीड़िता के अनुसार, घटना के बाद उसे घर से निकलने का मौका मिला, जिसके बाद वह सीधे पिलखुवा कोतवाली पहुंची और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी।

महिला की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने उसे चिकित्सकीय परीक्षण के लिए भेजा और मामले की जांच शुरू कर दी।

मेडिकल रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर होगी कार्रवाई

पुलिस का कहना है कि मामले में मेडिकल रिपोर्ट, शिकायत, दोनों पक्षों के बयान तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यदि जांच में कोई दंडनीय अपराध सामने आता है तो नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।

सीओ बोले— निष्पक्ष जांच की जाएगी

क्षेत्राधिकारी मुनीश चंद्र ने बताया कि विवाहिता की शिकायत प्राप्त हुई है। उसका मेडिकल कराया जा रहा है। मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और पुलिस के प्रारंभिक बयान पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने तथा न्यायिक प्रक्रिया से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।

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