जमीन विवाद से परेशान किसान ने बच्चों संग तहसील में आत्मदाह का किया प्रयास, अधिवक्ताओं की सतर्कता से टली अनहोनी

Hapur News: हापुड़ तहसील परिसर में सोमवार को जमीन विवाद से परेशान एक किसान द्वारा अपने बच्चों के साथ कथित रूप से आत्मदाह का प्रयास किए जाने से अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद अधिवक्ताओं और तहसील कर्मियों ने समय रहते हस्तक्षेप कर किसान को ऐसा कदम उठाने से रोक लिया। घटना में किसान और बच्चे सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

मामले की सूचना मिलते ही तहसील के अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसान को समझाकर शांत कराया। बाद में वरिष्ठ अधिकारियों ने उसकी शिकायत सुनी और भूमि विवाद से जुड़े पूरे प्रकरण की दोबारा निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया।

लंबे समय से चल रहा जमीन को लेकर विवाद

जानकारी के अनुसार कपूरपुर थाना क्षेत्र के गांव समाना निवासी किसान लखपत सिंह का गांव के ही एक व्यक्ति के साथ भूमि को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।

बताया गया है कि भूमि की पैमाइश और कब्जे से संबंधित प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया में भी रहा है। संबंधित आदेश के अनुपालन में हाल ही में तहसील प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में भूमि पर कब्जे से जुड़ी कार्रवाई कराई गई थी।

इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद और बढ़ने की बात सामने आई है। एक पक्ष की ओर से चारदीवारी क्षतिग्रस्त करने और मारपीट किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इस संबंध में पुलिस द्वारा प्रकरण की जांच किए जाने की बात कही गई है।

बच्चों के साथ तहसील पहुंचा किसान, मची अफरा-तफरी

सोमवार को किसान अपने बच्चों के साथ अपनी शिकायत लेकर तहसील परिसर पहुंचा था। इसी दौरान उसने कथित रूप से अपने और बच्चों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया।

स्थिति को देखते ही आसपास मौजूद अधिवक्ता तुरंत सक्रिय हो गए और किसान को ऐसा कदम उठाने से रोक दिया। शोर सुनकर तहसील कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी भी मौके पर पहुंच गए तथा बच्चों को सुरक्षित किया गया।

घटना के दौरान कुछ समय के लिए तहसील परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए।

सुरक्षा की दृष्टि से आत्मदाह के प्रयास की विस्तृत विधि या इस्तेमाल किए गए साधनों का विवरण प्रकाशित नहीं किया जा रहा है।

अधिवक्ताओं की सतर्कता से टली बड़ी अनहोनी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मौके पर मौजूद अधिवक्ता विशाल राणा, गजेंद्र कुमार और दीपक राणा ने स्थिति को भांपते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया। इसके बाद अन्य लोगों और तहसील कर्मियों की मदद से किसान को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित कर बच्चों को भी खतरे से दूर किया गया।

समय रहते किए गए हस्तक्षेप के कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

घटना ने तहसील परिसर में मौजूद लोगों को स्तब्ध कर दिया। साथ ही यह सवाल भी सामने आया कि भूमि विवाद को लेकर किसान ऐसी गंभीर मानसिक स्थिति तक कैसे पहुंचा और उसकी शिकायतों का समाधान किस स्तर पर लंबित रहा।

नायब तहसीलदार समेत अधिकारी पहुंचे मौके पर

घटना की जानकारी मिलने के बाद नायब तहसीलदार दिव्यांशी सिंह समेत संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसान को शांत कराया और उसकी समस्या सुनी।

किसान ने भूमि विवाद और उससे जुड़ी प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर अपनी शिकायत अधिकारियों के सामने रखी। अधिकारियों ने उसे आश्वस्त किया कि उसकी शिकायत को नियमानुसार सुना जाएगा और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर मामले की जांच कराई जाएगी।

एडीएम ने सुनी शिकायत, दोबारा जांच का आश्वासन

मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम संदीप कुमार भी तहसील पहुंचे और किसान की शिकायत सुनी।

बताया गया है कि भूमि विवाद से संबंधित दस्तावेजों, पूर्व में हुई प्रशासनिक कार्रवाई और दोनों पक्षों के दावों की दोबारा जांच कराने का आश्वासन दिया गया है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों के समझाने और शिकायत पर उचित कार्रवाई का भरोसा मिलने के बाद स्थिति सामान्य हुई।

बच्चों को खतरे में डालने की घटना भी जांच का विषय

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील पहलू किसान के साथ बच्चों की मौजूदगी है। किसी भी विवाद या मानसिक तनाव की स्थिति में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है।

प्रशासन के सामने अब भूमि विवाद के तथ्यों की जांच के साथ यह सुनिश्चित करने की भी जिम्मेदारी है कि परिवार को आवश्यक सहायता मिले और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।

भूमि विवाद में दोनों पक्षों के दावों, न्यायिक अथवा राजस्व आदेशों और प्रशासन द्वारा पूर्व में की गई कार्रवाई की वास्तविक स्थिति आधिकारिक अभिलेखों की जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध जानकारी और संबंधित पक्ष द्वारा किए गए दावों पर आधारित है। भूमि विवाद से जुड़े आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना गया है। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक एवं पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी। आत्महानि से संबंधित घटना को जिम्मेदार पत्रकारिता के तहत सीमित विवरण के साथ प्रकाशित किया गया है और ऐसी किसी कार्रवाई की विधि का विस्तृत वर्णन जानबूझकर नहीं दिया गया है।

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