स्कूल जा रहे बच्चों के पीछे दौड़ा बंदरों का झुंड, जान बचाने को भागे मासूम; कृष्णा नगर में दहशत

बंदरों के बढ़ते आतंक से बच्चों और अभिभावकों में डर, घरों की छतों और गलियों में भी उत्पात का आरोप; लोगों ने प्रशासन से तत्काल अभियान चलाने की मांग की

Hapur News: हापुड़ शहर के मोहल्ला कृष्णा नगर में बंदरों की बढ़ती गतिविधियों से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। सोमवार सुबह स्कूल जा रहे बच्चों के पीछे अचानक बंदरों का झुंड दौड़ पड़ा। बंदरों को अपनी ओर आता देखकर बच्चे घबरा गए और जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे और शोर मचाकर बंदरों को भगाया।

राहत की बात यह रही कि घटना में किसी बच्चे के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि घटना के बाद अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों की बढ़ती संख्या के कारण बच्चों को अकेले स्कूल भेजना भी मुश्किल होता जा रहा है।

स्कूल जा रहे बच्चों के पीछे दौड़े बंदर, मची अफरा-तफरी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सोमवार सुबह बच्चे रोजाना की तरह स्कूल जाने के लिए घरों से निकले थे। इसी दौरान गली में मौजूद बंदरों का झुंड अचानक बच्चों की ओर बढ़ने लगा।

बंदरों को पीछे आते देखकर बच्चे डर गए और तेजी से भागने लगे। कुछ देर के लिए सड़क पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।

बच्चों की आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों से बाहर निकले और शोर मचाकर बंदरों को दूर भगाने का प्रयास किया। इसके बाद बच्चे सुरक्षित आगे जा सके।

घटना के बाद अभिभावकों का कहना है कि यदि भागते समय कोई बच्चा गिर जाता या सड़क पर किसी वाहन की चपेट में आ जाता तो गंभीर हादसा हो सकता था।

बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से डर रहे अभिभावक

कृष्णा नगर के लोगों का कहना है कि बंदरों की समस्या अब रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगी है। सबसे ज्यादा चिंता सुबह स्कूल जाने और दोपहर में वापस लौटने वाले बच्चों को लेकर है।

अभिभावकों का कहना है कि कई स्थानों पर बंदरों के झुंड गलियों और मकानों की छतों पर बैठे रहते हैं। ऐसे में छोटे बच्चों को अकेले बाहर भेजना जोखिम भरा महसूस होता है।

कई परिवार अब बच्चों को स्कूल वाहन तक छोड़ने और वापस लेने के लिए स्वयं घर से बाहर निकलने को मजबूर हैं।

छतों और गलियों में भी बंदरों के उत्पात से लोग परेशान

स्थानीय निवासियों के अनुसार बंदरों की गतिविधियां केवल सड़कों तक सीमित नहीं हैं। बंदर अक्सर घरों की छतों, बालकनी और गलियों में पहुंच जाते हैं।

लोगों का कहना है कि कई बार बंदर खाने-पीने की वस्तुएं, कपड़े और अन्य सामान उठाकर ले जाते हैं। अचानक सामने आने पर लोगों को काटने या हमला करने का भी डर बना रहता है।

स्थिति ऐसी हो गई है कि कई महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग अकेले छत पर जाने से बचने लगे हैं।

बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों के अचानक पीछा करने पर सबसे ज्यादा खतरा छोटे बच्चों और बुजुर्गों को रहता है। घबराकर भागने के दौरान गिरने से भी गंभीर चोट लग सकती है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि समस्या को केवल बंदरों के काटने की घटनाओं तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। बंदरों के डर से सड़क पर अचानक भागने या वाहन के सामने आने जैसी स्थिति भी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं होने का आरोप

मोहल्लावासियों का दावा है कि बंदरों की समस्या को लेकर पहले भी संबंधित अधिकारियों और स्थानीय निकाय स्तर पर शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसी दिन गंभीर हादसा हो सकता है।

उन्होंने प्रशासन और नगर पालिका से प्रभावित इलाकों का सर्वे कर नियमानुसार बंदरों की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी अभियान चलाने की मांग की है।

कृष्णा नगर ही नहीं, शहर के अन्य इलाकों में भी समस्या

स्थानीय लोगों के अनुसार बंदरों की समस्या केवल कृष्णा नगर तक सीमित नहीं है। शहर के कई आवासीय इलाकों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास भी बंदरों के झुंड दिखाई देते हैं।

विशेष रूप से सुबह और शाम के समय बंदरों की गतिविधियां बढ़ने से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

लोगों का कहना है कि समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभागों को समन्वय बनाकर दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए।

लोगों की चेतावनी- हादसे का इंतजार न करे प्रशासन

सोमवार की घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि किसी बड़े हादसे का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए।

लोगों ने मांग की है कि प्रशिक्षित टीम के माध्यम से नियमानुसार अभियान चलाया जाए और आबादी वाले क्षेत्रों में बंदरों की बढ़ती गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए ठोस व्यवस्था की जाए।

क्या बोले अधिशासी अधिकारी?

नगर पालिका परिषद हापुड़ के अधिशासी अधिकारी संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि बंदरों की समस्या को लेकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। जल्द ही विशेष टीम की मदद से नियमानुसार कार्रवाई कर शहरवासियों को समस्या से राहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

कृष्णा नगर की ताजा घटना के बाद स्थानीय लोगों को अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है। अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है और उनकी मांग है कि समस्या गंभीर रूप लेने से पहले प्रभावी कदम उठाए जाएं।

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