
कॉमर्शियल बिजली कनेक्शन के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप, एंटी करप्शन टीम ने बिछाया जाल; रकम लेते ही दबोचे गए दोनों कर्मचारी
Hapur News: हापुड़ जिले में बिजली कनेक्शन के नाम पर कथित रिश्वतखोरी के मामले में एंटी करप्शन संगठन की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। अतराड़ा बिजलीघर से जुड़े दो कॉमर्शियल बिजली कनेक्शन के मामले में 12 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में अवर अभियंता (JE) सुधीर कुमार और संविदा लाइनमैन तारा को एंटी करप्शन टीम ने गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के बाद बिजली विभाग में हड़कंप मच गया।
एंटी करप्शन संगठन मेरठ की टीम ने शिकायत के आधार पर ट्रैप की कार्रवाई की। आरोप है कि कॉमर्शियल बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के एवज में रिश्वत मांगी गई थी। टीम ने योजना बनाकर शिकायतकर्ता को निर्धारित रकम के साथ भेजा और कथित तौर पर रकम लिए जाने के बाद दोनों को पकड़ लिया।
इसके बाद दोनों आरोपियों को हापुड़ देहात थाने लाया गया, जहां मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की गई।
दो कॉमर्शियल कनेक्शन के लिए किया था आवेदन
जानकारी के अनुसार गांव अजराड़ा निवासी युनूस ने गांव के ही सरताज और समीर के नाम पर दो-दो किलोवाट के कॉमर्शियल बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद कनेक्शन जारी नहीं किए गए। आरोप है कि संबंधित अवर अभियंता सुधीर कुमार ने फाइल आगे नहीं बढ़ाई और आवेदन निरस्त हो गया।
युनूस के अनुसार उन्होंने समस्या के समाधान के लिए कई बार बिजलीघर और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन कनेक्शन का मामला हल नहीं हुआ।
इसके बाद उन्होंने कथित रूप से रिश्वत मांगे जाने की शिकायत एंटी करप्शन संगठन मेरठ से की।
15 हजार रुपये मांगने का आरोप, 12 हजार में तय हुई रकम
शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने आरोपों का सत्यापन शुरू किया। शिकायतकर्ता के अनुसार संबंधित जेई से बातचीत के दौरान कॉमर्शियल कनेक्शन कराने के एवज में कथित तौर पर 15 हजार रुपये की मांग की गई।
आरोप है कि बातचीत के बाद रकम 12 हजार रुपये तय हुई।
शिकायत की पुष्टि और आवश्यक प्रक्रिया के बाद एंटी करप्शन टीम ने आरोपियों को पकड़ने के लिए ट्रैप की योजना तैयार की।
ट्याला स्टैंड पर बिछाया जाल
आरोप है कि सोमवार को शिकायतकर्ता को रिश्वत की तय रकम लेकर ट्याला स्टैंड बुलाया गया।
एंटी करप्शन टीम पहले से ही आसपास मौजूद थी और पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जेई ने सीधे रकम लेने के बजाय संविदा लाइनमैन तारा के माध्यम से रुपये मंगाए।
जैसे ही कथित तौर पर 12 हजार रुपये की रकम ली गई, एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों को पकड़ लिया। टीम ने मौके से रिश्वत के रूप में दिए गए रुपये बरामद करने का दावा किया है।
JE और संविदा लाइनमैन दोनों पर कार्रवाई
एंटी करप्शन टीम दोनों आरोपियों को अपने साथ हापुड़ देहात थाने लेकर पहुंची। वहां आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के बाद मामले में मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।
इसके बाद दोनों का मेडिकल परीक्षण कराया गया और आगे की विधिक प्रक्रिया शुरू की गई।
मामले में अब यह भी जांच का विषय होगा कि बिजली कनेक्शन से संबंधित फाइल किस स्तर पर लंबित थी और कथित रिश्वत की मांग में दोनों आरोपियों की क्या भूमिका रही।
17 सदस्यीय टीम ने दिया ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम
जानकारी के अनुसार इस कार्रवाई का नेतृत्व एंटी करप्शन संगठन के टीम प्रभारी मयंक अरोड़ा ने किया। ट्रैप टीम प्रभारी राहुल देव तोमर सहित जसवीर सिंह, नरेंद्र सिंह, किशनपाल सिंह और अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों को मिलाकर टीम में करीब 17 सदस्य शामिल बताए गए हैं।
टीम ने शिकायत और सत्यापन के आधार पर पूरे ऑपरेशन की योजना तैयार की थी। निर्धारित स्थान पर पहले से निगरानी की गई और कथित रिश्वत का लेनदेन होते ही कार्रवाई की गई।
पहले भी चर्चा में रह चुका है अतराड़ा बिजलीघर
इस कार्रवाई के बाद अतराड़ा बिजलीघर एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
जानकारी के मुताबिक करीब दो वर्ष पहले भी इसी बिजलीघर पर तैनात एक तत्कालीन अवर अभियंता के खिलाफ एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत के मामले में कार्रवाई की थी।
बताया जा रहा है कि उस मामले में भी शिकायतकर्ता युनूस ही थे। हालांकि मौजूदा मामले और पूर्व की कार्रवाई अलग-अलग प्रकरण हैं और दोनों को स्वतंत्र रूप से देखा जाना चाहिए।
बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
एक ही क्षेत्र से रिश्वत मांगने की शिकायतें सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नए बिजली कनेक्शन, मीटर, लाइन संबंधी कार्य और अन्य उपभोक्ता सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।
इस कार्रवाई के बाद यह भी देखा जाएगा कि बिजली विभाग अपने स्तर से संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ क्या विभागीय कदम उठाता है।
जांच में सामने आएगी पूरी भूमिका
एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई के बाद अब मामले की विवेचना में कथित रिश्वत की मांग, बातचीत, कनेक्शन से संबंधित दस्तावेज और रकम के लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों की जांच की जाएगी।
जांच के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि पूरे मामले में किस आरोपी की क्या भूमिका थी और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता भी रही है।