
लखनऊ— साहित्य और आध्यात्म के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए सेवानिवृत्त पुलिस उपाधीक्षक योगेंद्र पाठक के लिखे आध्यात्मिक ग्रंथ ‘वेदांत मर्म’ को उत्तर प्रदेश राज्य साहित्य संस्थान द्वारा 1,00,000 रुपये के प्रतिष्ठित गया प्रसाद शुक्ल ‘स्नेही’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके गहन अध्ययन, आध्यात्मिक दृष्टि और मौलिक चिंतन का प्रतीक माना जा रहा है।
आपको बता दे कि पुरस्कार समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव श्री पार्थ सारथी सेन ने योगेंद्र पाठक को यह सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. हरिओम ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आर.के. स्वर्णकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य साहित्य संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, साहित्यकार, बुद्धिजीवी और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे। समारोह के दौरान मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों ने योगेंद्र पाठक के साहित्यिक योगदान की सराहना की और ‘वेदांत मर्म’ को एक प्रेरणादायक एवं मार्गदर्शक ग्रंथ बताया। संचालक ने अपने उद्बोधन में योगेंद्र पाठक की विद्वता, गहन अध्ययन और मौलिक सोच की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ‘वेदांत मर्म’ न केवल वेदांत दर्शन की गूढ़ बातों को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है, बल्कि आधुनिक जीवन में उसकी प्रासंगिकता को भी स्पष्ट करता है। यह ग्रंथ पाठकों को आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जागरूकता की ओर प्रेरित करता है। सम्मान प्राप्त करते हुए योगेंद्र पाठक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरुओं, परिवार और पाठकों को दिया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सदैव भारतीय दर्शन और संस्कृति को सरल रूप में समाज के सामने प्रस्तुत करना रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग उससे जुड़ सकें। कार्यक्रम के अंत में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच योगेंद्र पाठक को सम्मानित किया गया, जिससे पूरे सभागार में उत्साह और गर्व का माहौल बन गया। यह उपलब्धि न केवल योगेंद्र पाठक के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र और साहित्य जगत के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है।