
कानपुर। कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर तरह-तरह की सावधानियां बरतनी पड़ेगी, ताकि इस वैश्विक महामारी से बचा जा सके। इसमें एक महत्वपूर्ण सावधानी महिलाओं को लेकर है और उन्हें इसके अधिक प्रकोप के प्रभावी (पीक) होने पर गर्भधारण से बचना चाहिये। हालांकि गर्भधारण विषय दम्पति का है, लेकिन कोरोना की पहली और दूसरी लहर में गर्भवती महिलाओं की समस्याओं को देखते हुए यह सलाह दी जा रही है कि संभावित तीसरी लहर का प्रकोप जब चरम पर हो तो उनको इसकी दुश्वारियों या यूं कहें की दुष्परिणामों का सामना न करना पड़े। ऐसे में जो दम्पति योजना के तहत बच्चा पैदा करना चाहते हैं तो कोरोना की तीसरी लहर के बाद ही विचार करें। यह बातें मंगलवार को खास बातचीत में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. सुनीता गौतम ने कहीं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को गर्भधारण करने से लेकर प्रसव तक तमाम प्रकार की परेशानियों व जांच का सामना करना पड़ता है। इन परेशानियों के लिए विशेषज्ञ डाक्टर की जरुरत पड़ती है, लेकिन कोरोना की पहली और दूसरी लहर में देखा गया कि सभी अस्पतालों की ओपीडी बंद रही, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ गईं। कुछ महिलाएं प्रसव के दौरान कोरोना की चपेट में भी आ गईं और कुछ नवजात भी इस महामारी से अछूते नहीं रहें। ऐसे में गर्भवती से लेकर उनका परिवार प्रभावित हुआ और खुशी भरे उस लम्हे में भी जान पहचान के लोग दूरी बनाये रखें।
बताया कि सबसे खास बात यह है कि गर्भधारण करने वाली महिलाओं को प्रसव होने तक कम से कम तीन बार तो अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। पहली बार गर्भधारण के तीन माह के अंदर, दूसरी बार पांच माह के अंदर जब भ्रूण बच्चे की शक्ल ले लेता है और तीसरी बार नौ माह के अंदर जब यह देखना जरुरी होता है कि बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है कि नहीं, ताकि प्रसव में प्रसूता को किसी प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए जो महिलाएं गर्भधारण की योजना बना रही हों उनको सलाह दी जा रही है कि कोरोना की तीसरी लहर गुजरने के बाद ही विचार करें।
डा. सुनीता गौतम ने बताया कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए गर्भधारण के सम्बंध सिर्फ महिलाओं को ही सलाह नहीं दी जा रही है, इसमें पुरुष भी सहयोग करें। दंपति को सुरक्षित प्रजनन क्रिया करनी चाहिये, ताकि डाक्टरों से परामर्श कम से कम लेना पड़े। दंपतियों को चाहिये कि कोरोना वैक्सीन जरुर लगवाएं और कोरोना की तीसरी लहर खत्म होने के बाद अपनी योजना के अनुसार महिलाएं गर्भधारण पर विचार करें। बता दें कि, गर्भाधारण के लिए डॉ. सुनीता गौतम का एक विशेषज्ञ महिला डॉक्टर होने के नाते यह सलाह आने वाले बेहतर व सेहतमंद शिशु के जन्म को लेकर कोविड महामारी की दुष्परिणामों से बचाने के लिए दी जा रही है। साथ ही प्रसूताओं की परेशानियों को लेकर सेचत करने वाली है। यह किसी व्यक्तिगत भावना को लेकर बाध्य नहीं करता है। गर्भाधारण करना दम्पति का अपना विवेकाधिकार है।